अब बात करते हैं की लोग पैसे के लिये क्या क्या करेगे , धोनी क्या क्या नहीं करते ?? अमिताभ क्या क्या नहीं करते ?? अगर जिन्दगी बिना पैसे के चल जाती तो शायद ही किसी को काम करना पड़ता .
अब जिस को जो काम आयेगा वो वही करेगा . एक गर्भवती पहलवान लड़की अगर पैसा कमाना चाहती हैं तो इस में हर्ज क्या हैं ? अगर वो बच्चे को शो के दौरान जनम दे भी देती हैं तो इस से क्या फरक पड़ेगा ?? हो सकता हैं वो इसीलिये यहाँ आयी हो ताकि जो भी खर्चा हैं वो चॅनल करे .
अगर याद आये तो याद करिये एक ब्रिटिश कलाकार ने अपनी मृत्यु तक को स्पोंसर कर दिया था ताकि उसके बच्चो के लिये अथाह पैसा हो
मुझे वाकई ये समझ नहीं आता की पैसा कामना क्यूँ बुरा हैं अगर वो बिना बेइमानी के कमाया जा रहा हैं . और खुशदीप की पुरानी आदत हैं वो महिला पर बड़ी जल्दी ऊँगली उठा देते हैं इस से पहले प्रियंका के ऊपर भी वो पोस्ट लिख चुके हैं सो आपत्ति दर्ज करना बेकार हैं क्युकी उनको शायद महिला का पैसा कमाना ही गलत लगता हैं हमेशा .
और पूरी पोस्ट में कहीं भी प्रतिकार नहीं हैं की शक्ति कपूर जैसे व्यक्ति को जिस के ऊपर स्टिंग तक से ये साबित हो चुका हैं वो यौन शोषण का दोषी हैं को क्यूँ इस शो में रखा गया .
अब ये ना कहे ये तो उन महिला को कहना चाहिये जो उस शो में हैं क्युकी वो सब तो इन जैसो को सही रखना जानती हैं
किसी गर्भवती महिला के ऐसे वक्त पर परिवार के सदस्यों से दूर रहने में कोई बुराई नहीं है
तो रचना जी का तर्क जायज़ है...कितनी ही मजदूर औरते सडको पर बच्चे जनती हैं , जनपथ पर हुई जच्चगी भूल गये क्या या , अस्पतालों के बाहर वरांडे में बच्चा पैदा होता हैं , ये याद हैं या बच्चा होता ही सड़क पर फ़ेंक दिया जा ता हैं क्यूँ गरीबी , पैसा ना होना
परिवार का महातम रोटी से बड़ा नहीं होता
शो के आयोजकों की मेडिकल सुविधाएं अगर घर के सदस्यों के साथ रहकर भावनात्मक और मानसिक रूप से संबल दिए जाने पर भारी हैं तो रचना जी का तर्क जायज़ है...
जहां पुरुष बाहर काम करते हैं और महिला कहीं और वहाँ क्या होता हैं , आज कल ना जाने कितनी गर्भवती महिला ८ मॉस तक काम करती हैं ताकि बच्चा होने के बाद आराम कर सके
अमेरिका के कैलिफोर्निया में पति के साथ वेल सेटल्ड महिला का सृष्टि के विधान की प्लानिंग के साथ सिर्फ पैसे के लिए नुमाइश करना स्वालंबन है तो रचना जी का तर्क जायज़ है...
किसी भी अमीर पर ऊँगली उठाना महज इसलिये क्युकी उसके पास हम से ज्यादा हैं कितना सही हैं सोचिये , ये उन पति पत्नी का मामला हैं और आप के पास क़ोई साक्ष्य हैं की वो पति वेल सेटल ही हैं , मंदी के दौर में अमेरिका में कौन सैटल हैं ये अखबार पढ़ ले
हो सकता है एक माँ अपना और बच्चे का भविष्य सुधार रही हो
अगर मैंने कभी किसी पुरुष या संस्थान के खिलाफ आलोचनात्मक पोस्ट नहीं लिखी तो रचना जी का तर्क जायज़ है...
कितनी लिखी हैं पता नहीं क्युकी जब भी किसी महिला को पैसा कमाते देखते हैं आप तुरंत उनके ऊपर पैसा कमाने को ले कर आक्षेप लगा देते हैं
अब गर्भवती केवल महिला ही होगी पुरुष नहीं और अपने और अपने बच्चे के सुरक्षित भविष्य के लिये वो महिला जिम्मेदार हैं वो पैसा कमाये ये उसकी मर्जी क्युकी पिता को ९ महीने ऐसा क़ोई फैसला करना पडे इस की नौबत ही नहीं आती हैं
हर मुद्दे को महिला-पुरुष के नज़रिए से ही देखा जाना चाहिए तो रचना जी का तर्क जायज़ है...
हर मुद्दे को महिला - पुरुष की के नज़रिये से देख कर ही ये सब पोस्ट आती हैं क्युकी महिला के लिये माँ बनना यानी ९ महीने शिशु को पेट में रखना एक सजा नहीं हैं और ये बात साइंस भी मानती हैं की काम करने से क़ोई नुक्सान नहीं होता
अब घास हमेशा हरी ही नज़र आए तो क्या करूं, चाहे सावन हो या न हो...
सावन हो क्या क़ोई भी मौसम हो अगर औरत पर टार्गेट करके लिखेगे को घास खिलाने आना ही पड़ेगा
मेरे ही लिखे पुराने लिंक हैं इसी ब्लॉग से , मिलते हुए विषय पर
फिर चाहे वो "राखी का स्वयम्बर " हो या "सच का सामना " या "मुझे इस जंगल से बचाओ " मकसद सिर्फ़ इतना हैं कि पैसा हो ताकि जिंदगी आसान हो ।
केवल नारी को पैसा नहीं कमाना चाहिये और हर नैतिकता का ध्यान रखना चाहिये मुझे इस बात से ना कभी इतिफाक था ना होगा । माँ बनना , और काम करना , पैसा कमाना सब अपने अपने व्यक्तिगत निर्णय हैंलेकिन क्युकी क़ोई माँ बनने वाली हैं और काम कर रही हैं , गलत हैं मुझे नहीं लगता ये सोच सही हैं ।
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