जितना
समय ये किशोर उन क्लिप को देखने में लगाते हैं उतने समय में कुछ और भी कर
सकते हैं नहीं करते क्यूँ क्युकी नारी शरीर , पोर्न से "रिफ्रेश " होना
उनका अधिकार हैं।
अरुण को कैसे पता उनके मोबाइल में पोर्न
था , क्या उन्होने उनके मोबाइल चेक किये थे , क्या देखने बाद उन्होने पुलिस
में कम्प्लेंट करना उचित नहीं समझा ? क्यूँ नहीं समझा ? ना बालिग़ के
मोबाइल में पोर्न , या बालिग़ के मोबाइल में पोर्न होना अपराध हैं , इतनी सी
बात नहीं पता अरुण राय को ?? मेरा कमेन्ट इस लिंक पर
"यह याद रखना होगा कि बलात्कार केवल एक यौन अपराध नहीं है. इसके सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक पक्ष भी हैं. इसीलिए इसका कोई भी दीर्घकालिक तथा स्थाई निराकरण समाज के भीतर से अमानवीकरण के लिए जिम्मेदार परिस्थितियों तथा स्त्रीविरोधी पितृसत्तात्मक मानसिकता से एक फैसलाकुन जंग लड़े बिना मुमकिन नहीं है. "Ashok Kumar Pandey
अशोक कुमार पाण्डेय ये और बता देते की कितने साल ये जंग लड़नी होगी।
क्या आप को ये नहीं दिखता ये सब बच्चे इस दुनिया में कैसे आये हैं , कितनी विवाहित महिला यौन हिंसा और रोज बलात्कार का शिकार होती हैं और जिसका परिणाम ये बच्चे होते हैं। एक एक घर में ६ -६ बच्चे कैसे पैदा होते हैं जहां पुरुष काम ही नहीं करता हैं और रोज अपनी बीवी का बलात्कार करता हैं।
सामाजिक सुधार कैसे होगा ?? पुरुष को रिफ्रेश होने के लिये स्त्री का शरीर कब तक सुलभ उपलब्ध होता रहेगा ??
पूरे आलेख में कहीं भी स्त्री की बात , उसकी हां या ना और उसी उम्र की किशोर बच्चिया भी क्या किसी का रेप करती मिली हैं आप को कभी। नहीं वो तो घरो में मैड का , झाड़ू लगाने का , बेबी सिटींग का काम करती हैं ना तो उनके पास हैं और ना उनकी सैलरी उनको मिलती हैं।
हर घर में एक भी या बाप हैं जो उनकी तनखा पर अधिकार रखता हैं और उन पर निगरानी भी। और उनकी माँ भी गाहे बगाहे इन बच्चियों की मार कुटाई इनके बाप भाई से करवा कर अपने कर्त्तव्य की इती समझती हैं
बलात्कार स्त्री के प्रति सबसे बड़ी हिंसा हैं और बलात्कार इस लिये नहीं होते क्युकी समाज में कई क्लास हैं , बल्कि इस लिये होते हैं क्युकी पुरुष को अपनी सत्ता कयाम रखें का ये सबसे आसन तरीका लगता हैं।
आप के आलेख स्त्री मुक्ति के लिये तो बिलकुल नहीं हैं हाँ उसकी आड़ में पुरुष को कुकर्म को एक आड़ देने की चेष्टा जरुर हैं।