लड़की,बिकनी और समुद्र का सीमेन्ट से क्या लेना-देना? अब इस पोस्ट पर आये कमेन्ट लीजिये
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लड़की वो भी बिकनी मे समझ मे नही आया उसे दिखा कर सेल कैसे प्रमोट हो सकती है अनिल भय्या आप तो महिलायों खास कर लडकियों के शुभ चिन्तक और प्रेमी रहे है और आपको तो इसके सोंदर्य पर चर्चा करनी चाहिए आप कहा इस लफड़े में पड़े है आज की महिलायों को आप सिखाने जायेगे और वो दकियानूस कहेगे शायद आप ..........................तो छत्तीसगढ़ और प्रदेश के सीमेंट निर्माता संघ की कोटरी को अच्छे से जानते है जिसने जनता की चुनी सरकार को खरीद कर जनता के साथ द्रोपदी जेसा चीरहरन करते हुए रेट पर रेट बढ़ाये पड़े है और हम मूकदर्शक
- या इस पोस्ट पर
लड़कियां मोबाईल का प्लान नही है टाटा सेठ जो चाहे रोज़ बदल लो!
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ऎसे विज्ञापन पर लोग कयो नही एतराज करते, ओर ब्लांग कि कुछ खास नारिया जो अपने आप को ब्लांग की ओर नारियो की ठेके दार समझती है वो क्यो नही ऎसे मामलो पर बोलती?? जो सभी ब्लांग पर थाने दारो की तरह घुमती फ़िरती है.... अगर हम सब इन बातो का बिरोध करे तो किसी की हिम्मत नही हो सकती ऎसे विज्ञापन दिखाने की.
आप ने इस ओर ध्यान दिलाया, आप का बहुत बहुत धन्यवाद
ख़ैर आप सब कि जानकारी के लिये बता दूँ किसी भी अश्लील विज्ञापन के खिलाफ आप कहाँ अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं ,
आप को इस लिंक पर जा कर Advertising Standards Council of India कि साईट पर अपनी शिकायत दर्ज करानी हैं । जितनी ज्यादा शिकायत दर्ज होगी उतना ज्यादा जल्दी वो विज्ञापन हटाया जायेगा ।
और हाँ वहाँ आप को नियमो की भी जानकारी मिल जायेगी । उनको पढ़ कर ये भी साफ़ हो जाएगा कि किस विज्ञापन के खिलाफ वाकयी शिकायत दर्ज भी लिख जासकती हैं या नहीं ।
किसी भी विज्ञापन मे काम कर रही महिला के प्रति असहिष्णु होने से पहले ये जरुर सोचे कि वो मात्र एक मोडल हैं और ये भी कि किसने सिखाया हैं नारी को कि वो अपने शरीर को जरिया बना कर पैसा / रोजी रोटी कमा सकती हैं । कौन पढता हैं प्ले बौय मैगजीन , कौन देखता हैं एफ टी वी और कौन लेता हैं किंग फिशेर कैलेंडर , कौन सा वर्ग हैं ??
अब आप थानेदार कहो , जमादार कहो या जो भी नाम देना हो दो कोई फरक नहीं पड़ता क्युकी हमारा मकसद साफ़ हैं हम ब्लॉग पर नारी के प्रति असहिष्णुता और निर्मम व्यंगो को ऊपर लाकर पारदर्शिता कायम करते रहेगे ।
आप कि तरह हम कहते कुछ हैं करते कुछ हैं मे विश्वास नहीं करते । विद्रूपता और अश्लीलता अगर और माध्यमो मे हैं और आप ब्लॉग पर लिख कर उसको दूर करना चाहते हैं तो पहले ब्लॉग पर से तो उसको हटाये ।और वैसे हर एक के लिये अश्लीलता अलग अलग होती हैं क्युकी नैतिकता हमेशा सामाजीक होती हैं कभी व्यक्तिगत नहीं होती !!!! अगर ऊपर लिंक मे दी हुई जैसे पोस्ट कोई महिला लिखती तो अब तक उसके खिलाफ हिंदी ब्लॉग जगत मे फतवा दे ही दिया गया होता और वहाँ स्माईली कि बहार हैं क्युकी पुरुष जो भी लिखे वो सब जायज और ठीक हैं और उसको बर्दाश्त करना औरत कि नियति हैं ।
नहीं करुगी , निरंतर लिखुगी हर फतवे के बाद भी हर व्यंग के बाद भी
आशा हैं आप सब अश्लील विज्ञापनों के खिलाफ एक जंग अब सही तरीके से छेड़ सकेगे । हम आप का रास्ता इतनाआसान तो कर ही सकते हैं । हर समस्या का कोई ना कोई समाधान होता हैं और वही समाधान खोजे , समस्या को बार ना बताये । क्युकी समाधान खोजने मे समय लगता हैं सो वो समय निकले और ब्लोगिंग पर औरो को भी उस समाधान से अवगत कराये ।
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