देश के एक वरिष्ठ पत्रकार से बात हुई... बात दुआ सलाम के बाद महिला आरक्षण और फिर शिया धर्म गुरु कल्बे जव्वाद के शर्मनाक बयान पर आकर रुक गई... वरिष्ठ पत्रकार महोदय ने हमारी प्रतिक्रिया जाननी चाही...
हमने कहा- कौम के लिए इससे ज़्यादा डूब मरने की बात क्या होगी कि कल्बे जव्वाद जैसा व्यक्ति मुस्लिम औरतों के बारे में सरेआम बेहद शर्मनाक बयान दे रहा है और मुस्लिम मर्द तमाशा देख रहे हैं...आख़िर कोई अपनी मां, बहन और बेटियों की इस 'बेइज्ज़ती' पर खामोश कैसे रह सकता है...? क्या लोगों की ग़ैरत मर चुकी है...? क्या मुस्लिम औरतों को हमेशा इसी तरह बेइज्ज़त होते रहना होगा...?
-फ़िरदौस ख़ान
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