नारी ब्लॉग को रचना ने ५ अप्रैल २००८ को बनाया था

हिन्दी ब्लोगिंग का पहला कम्युनिटी ब्लॉग जिस पर केवल महिला ब्लॉगर ब्लॉग पोस्ट करती हैं ।

यहाँ महिला की उपलब्धि भी हैं , महिला की कमजोरी भी और समाज के रुढ़िवादि संस्कारों का नारी पर असर कितना और क्यों ? हम वहीलिख रहे हैं जो हम को मिला हैं या बहुत ने भोगा हैं । कई बार प्रश्न किया जा रहा हैं कि अगर आप को अलग लाइन नहीं चाहिये तो अलग ब्लॉग क्यूँ ??इसका उत्तर हैं कि " नारी " ब्लॉग एक कम्युनिटी ब्लॉग हैं जिस की सदस्या नारी हैं जो ब्लॉग लिखती हैं । ये केवल एक सम्मिलित प्रयास हैं अपनी बात को समाज तक पहुचाने का

15th august 2011
नारी ब्लॉग हिंदी ब्लॉग जगत का पहला ब्लॉग था जहां महिला ब्लोगर ही लिखती थी
२००८-२०११ के दौरान ये ब्लॉग एक साझा मंच था महिला ब्लोगर का जो नारी सशक्तिकरण की पक्षधर थी और जो ये मानती थी की नारी अपने आप में पूर्ण हैं . इस मंच पर बहुत से महिला को मैने यानी रचना ने जोड़ा और बहुत सी इसको पढ़ कर खुद जुड़ी . इस पर जितना लिखा गया वो सब आज भी उतना ही सही हैं जितना जब लिखा गया .
१५ अगस्त २०११ से ये ब्लॉग साझा मंच नहीं रहा . पुरानी पोस्ट और कमेन्ट नहीं मिटाये गए हैं और ब्लॉग आर्कईव में पढ़े जा सकते हैं .
नारी उपलब्धियों की कहानिया बदस्तूर जारी हैं और नारी सशक्तिकरण की रहा पर असंख्य महिला "घुटन से अपनी आज़ादी खुद अर्जित कर रही हैं " इस ब्लॉग पर आयी कुछ पोस्ट / उनके अंश कई जगह कॉपी कर के अदल बदल कर लिख दिये गये हैं . बिना लिंक या आभार दिये क़ोई बात नहीं यही हमारी सोच का सही होना सिद्ध करता हैं

15th august 2012

१५ अगस्त २०१२ से ये ब्लॉग साझा मंच फिर हो गया हैं क़ोई भी महिला इस से जुड़ कर अपने विचार बाँट सकती हैं

"नारी" ब्लॉग

"नारी" ब्लॉग को ब्लॉग जगत की नारियों ने इसलिये शुरू किया ताकि वह नारियाँ जो सक्षम हैं नेट पर लिखने मे वह अपने शब्दों के रास्ते उन बातो पर भी लिखे जो समय समय पर उन्हे तकलीफ देती रहीं हैं । यहाँ कोई रेवोलुशन या आन्दोलन नहीं हो रहा हैं ... यहाँ बात हो रही हैं उन नारियों की जिन्होंने अपने सपनो को पूरा किया हैं किसी ना किसी तरह । कभी लड़ कर , कभी लिख कर , कभी शादी कर के , कभी तलाक ले कर । किसी का भी रास्ता आसन नहीं रहा हैं । उस रास्ते पर मिले अनुभवो को बांटने की कोशिश हैं "नारी " और उस रास्ते पर हुई समस्याओ के नए समाधान खोजने की कोशिश हैं " नारी " । अपनी स्वतंत्रता को जीने की कोशिश , अपनी सम्पूर्णता मे डूबने की कोशिश और अपनी सार्थकता को समझने की कोशिश ।

" नारी जिसने घुटन से अपनी आज़ादी ख़ुद अर्जित की "

हाँ आज ये संख्या बहुत नहीं हैं पर कम भी नहीं हैं । कुछ को मै जानती हूँ कुछ को आप । और आप ख़ुद भी किसी कि प्रेरणा हो सकती । कुछ ऐसा तों जरुर किया हैं आपने भी उसे बाटें । हर वह काम जो आप ने सम्पूर्णता से किया हो और करके अपनी जिन्दगी को जिया हो । जरुरी है जीना जिन्दगी को , काटना नही । और सम्पूर्णता से जीना , वो सम्पूर्णता जो केवल आप अपने आप को दे सकती हैं । जरुरी नहीं हैं की आप कमाती हो , जरुरी नहीं है की आप नियमित लिखती हो । केवल इतना जरुरी हैं की आप जो भी करती हो पूरी सच्चाई से करती हो , खुश हो कर करती हो । हर वो काम जो आप करती हैं आप का काम हैं बस जरुरी इतना हैं की समय पर आप अपने लिये भी समय निकालती हो और जिन्दगी को जीती हो ।
नारी ब्लॉग को रचना ने ५ अप्रैल २००८ को बनाया था

February 15, 2013

अब आप बताये क्या करूँ

रचना जी
नमस्ते
एक समस्या हैं ,मेरी , ब्लॉग पर पोस्ट कर दे . शायद कुछ समाधान मिले .

"
मै एक 30 वर्ष का नव युवक हूँ और मैने ऍम सी ऐ किया हुआ हैं . पिछ्ले 7 साल से में दिल्ली मे रहता हूँ और नौकरी करता हूँ . मेरे परिवार में मुझसे 4 साल छोटा एक भाई हैं जो नॉएडा में नौकरी करता हैं .
मेरे माता पिता दिल्ली से दूर लखनऊ के पास रहते हैं

तकरीबन 1 साल पहले मेरा विवाह उन्होने बलिया में रहने वाली एक लड़की से तय किया था, लड़की 28 साल की हैं  . लड़की बी एस सी बी एड हैं . लेकिन नौकरी नहीं करती थी . मेरी इच्छा नौकरी करने वाली और दिल्ली में रहने वाली लड़की से शादी करने की थी पर मै अपने पिता के आगे नहीं बोल पाया , उनके तय किये रिश्ते से ही मेरी  शादी हुई .

मै लड़की से केवल एक बार मिला था शादी से पहले लेकिन शादी के बाद मेरा ताल मेल उस लड़की से बिलकुल नहीं बैठ रहा हैं .
उस लड़की का मेंटल मेकप मेरी सोच से बिलकुल नहीं मिलता हैं . उसको खाना बनाना बिलकुल नहीं आता हैं . मुझे उससे कोई ख़ास फरक नहीं पडा क्युकी मुझे लगा वो कुछ समय में ये सीख जायेगी पर ऐसा नहीं हुआ , उसके लिये माइक्रोवेव , वाशिंग मशीन  इत्यादि बिलकुल नयी तकनीक हैं और मेरे सीखने के बाद भी उसको सीखने मे बहुत समय लगता हैं जो दिल्ली की भागम भाग जिन्दगी में किसी के पास नहीं हैं .
मेरे कहने से उसने वेस्टर्न कपड़े पहनने शुरू करदिये हैं लेकिन उसकी बोल चाल मे कोई फरक नहीं हैं .
मै उसे अपने दोस्तों के बीच में नहीं ले जा पाता हूँ क्युकी मुझे उसके बोलचाल का तरीका पसंद नहीं आता हैं . वो साथ में बैठ कर ड्रिंक इत्यादि भी सही तरीके से कम्पनी के लिये भी नहीं ले पाती हैं . हम पूरे एक साल में भी कभी एक साथ अकेले कहीं घुमने नहीं गए क्युकी मेरी इच्छा ही नहीं होती उसके साथ कहीं भी जाने की { हनीमून पर हम बस 1 हफ्ते के लिये गए थे }
मै चाहता हूँ वो किसी प्रोफेशनल की तरह कहीं नौकरी करे , किसी स्कूल में नहीं लेकिन ये संभव नहीं हो रहा हैं क्युकी उसकी शिक्षा का स्तर बहुत फरक हैं .
मेरे माँ पिता चाहते हैं वो उनके साथ रह कर कोई सरकारी नौकरी कर ले लेकिन इसके लिये लड़की के परिवार वाले तैयार नहीं हैं . वो उसे मेरे साथ दिल्ली मे ही रखना चाहते हैं .
मुझे उस लड़की मे कोई रूचि नहीं हैं .
मेरे लिये जिन्दगी में क्या ऑप्शन अब हैं ?
क्या मुझे ना चाहते हुए भी इस रिश्ते की आजन्म ढोना होगा ??

हमें शादी के समय बताया गया था की लड़की बहुत काबिल हैं और पी सी ऐस की त्यारी कर रही हैं , मेरे माता पिता खुद उसको इम्तिहान दिलवाने गए थे लेकिन उसने प्रीलिम नहीं पास कर पाया . अब उसकी इंग्लिश देख कर लगता हैं की दिल्ली में तो 8 पास बच्चे भी इस से बेहतर इंग्लिश लिखते हैं .

हां चलते चलते ये भी बता दूँ शादी पूरे रीति रिवाजो से हुई थी , यानी दान दहेज़ के साथ . लेकिन वो दान देहेज तो सब मेरे अभिभावक के पास हैं और मेरी पत्नी जिस से मेरा सामंजस्य कभी नहीं हो सकता मेरे पास हैं .

मेरी गलती इतनी हैं की मै अपने पिता के निर्णय का विरोध नहीं कर सका ,

अब मेरे लिये क्या जिन्दगी मे सब रास्ते बंद हो गए जो मुझे जीवन साथी से ख़ुशी मिल सके .
आज कल मे सुबह 6 बजे घर से जाता हूँ , और शाम को 10 बजे के बाद आता हूँ
अपनी एक जानकार के यहाँ मैने अपनी पत्नी को नौकरी पर रखवा दिया हैं . लेकिन उनका कहना हैं की वो ज्यादा दिन उसको नहीं रख सकेगी क्युकी उसको काम करना नहीं आता हैं और ना ही वो कुछ सीख पा रही हैं . उनको भी लगता हैं की किसी स्कूल में शायद वो कुछ बेहतर कर सके . मुझे स्कूल टीचर अपनी पत्नी नहीं चाहिये , कभी नहीं .

अब आप बताये क्या करूँ

सादर
आ बा सा
"

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69 comments:

  1. रचना जी,
    जो समस्या इस लड़के की है. लगभग ऐसी ही समस्या से मेरे आस-पास के तीन-चार लड़के जूझ रहे हैं. लोग झूठ बोलकर अपनी लड़कियों की शादी करवा देते हैं. सोचते हैं कि शादी के बाद सब ठीक हो जाएगा, लेकिन अब ज़माना बहुत बदल गया है. अब वो ज़माना नहीं रहा, जब पत्नी घर पर संयुक्त परिवार में रहा करती थी, परदे में और पति बाहर काम करता था. आजकल के लड़के स्मार्ट लड़की चाहते हैं. घरवाले ये बात नहीं समझते. वो अभी उसी दुनिया में जी रहे हैं. ऐसे में अजीबा स्थिति पैदा हो जाती है. सरकारी नौकरी में तो चल जाता है क्योंकि वहाँ पार्टी वगैरह में पत्नी की उपस्थिति उतनी मायने नहीं रखती, लेकिन प्राइवेट और कापरेट सेक्टर में बहुत मुश्किल हो जाती है.
    वैसे मैं इसके लिए लड़कों को भी ज़िम्मेदार मानती हूँ कि वे विरोध क्यों नहीं कर पाये? लेकिन जब झूठ बोला गया हो, तब क्या? लड़की को एक बार देखकर बहुत कुछ नहीं जाना जा सकता. उस समय अगर वो ठीक से बात नहीं करती तो ये कह दिया जाता है कि पहली बार मिलने के कारण झिझक रही है. माँ-बाप की सबसे बड़ी गलती होती है इसमें. लकड़ी को बोझ समझकर किसी भी तरह उतार देने के चक्कर में वो ये नहीं देखते कि बेमेल विवाह का परिणाम क्या होगा?
    लड़की की इसमें कोई गलती नहीं होती, लेकिन वो भी खामियाजा भुगतती है. उसे तो विरोध का अधिकार भी नहीं होता.
    ये समस्या आजकल छोटे शहरों से महानगरों में आये नवयुवकों के लिए बहुत बड़ी समस्या बन गयी है. इसका समाधान इसी में है कि वे शादी के समय विरोध करें, पर जब धोखे से शादी करा दी गयी हो, तो स्थिति बड़ी जटिल हो जाती है क्योंकि हमारे यहाँ तलाक की प्रक्रिया बहुत जटिल है और ऐसे मामलों में लड़की वाले तलाक के लिए तैयार भी नहीं होते. ठीक ऊपर वाली समस्या से जूझ रहा इसी उम्र का लड़का, जो मेरी बिल्डिंग में रहता है, कल रात ही मकान मालिक से आत्महत्या की बात कर रहा था. मेरे लैंड लोर्ड बहुत अच्छे इंसान हैं. उन्होंने मुझसे भी पूछा कि क्या करना चाहिए. आज सुबह से उसकी काउंसलिंग कर रहे हैं.
    शादी हो जाने के बाद क्या समाधान हो, इसमें मैं भी कन्फ्यूज्ड हूँ. मेरे कुछ साथियों की ज़िंदगी भी इसी चक्कर में बर्बाद है, न वो अपनी पत्नी के साथ रह पा रहे हैं और न दूसरी शादी कर सकते हैं.

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    1. मुक्ति ,

      @आजकल के लड़के स्मार्ट लड़की चाहते हैं. घरवाले ये बात नहीं समझते.

      घरवाले क्यूँ समझें ये बात ? अगर स्मार्ट लड़की चाहते हो तो खुद चुनो, लकड़ी से मिलो, उसके बात-चीत का तरीका देखो और फिर निर्णय लो . बाद में जो शिकायत करते हो कि लड़की को अंग्रेजी नहीं आती या बातचीत का लहजा मेट्रो वाला नहीं है। उसी वक़्त बात करके देखो। और आजकल लड़की के माता--पिता जोर देने पर लड़के-लड़की को अकेले में बात करने की छूट दे देते हैं (दरअसल वे लोग तो लड़के वाले की हर शर्त मान लेते हैं, अपने सर से बोझ जो उतारना होता है ) लेकिन नहीं वहां तो आदर्श बेटे का चोला धारण करना है, जैसा माता पिता तय करें तो फिर बाद में शिकायत क्यूँ ?

      और ये प्राइवेट और कारपोरेट सेक्टर की पार्टियों की जहाँ तक बात है, ये लड़के भी जन्म से सीख कर नहीं आये थे, वे अपना पहला अनुभव याद करें कि वे कितने असहज थे, धीरे-धीरे उन्होंने वहाँ के तौर तरीके सीखे। पर चाहते हैं, पत्नी पहली बार में ही बिलकुल कॉन्फिडेंट बिहेव करे, ऐसा कैसे हो सकता है ?

      और अराधना आज के जमाने में कोई धोखे से शादी नहीं करा सकता। आप धोखा खाने का ढोंग रचना चाहते हैं, तो और बात है। किसी ख़ास एरिया का रहन-सहन कैसा है , बोल-चाल कैसी है, पढ़ाई-लिखाई का स्तर कैसा है ,ये सबको पता होता है।

      वो आत्महत्या की बात करने वाला लड़का, आत्महत्या कर ही ले तो अच्छा है, (यह कोरी धमकी है, सहानुभूति पाने को ) मुश्किलों का सामना न कर ,यूँ कायरता की बात करने वाले किसी सहानुभूति के लायक नहीं हैं।
      और तुम्हारे जो साथी परेशान हैं, उनसे कहो जरा याद करें, जब वे पहली बार ट्रेन में बैठ कर दिल्ली आये थे तो कैसे थे?? अब वे दिल्ली में पली-बढ़ी लड़कियों से अपनी पत्नी की तुलना करना चाहते हैं तो फिर परेशान रहना उनकी किस्मत है।दुःख तो उनकी पत्नियों के लिए होता है, जिनकी शादी उसी छोटे शहर में हुई होती और वे एक सम्मान जनक ज़िन्दगी की हक़दार होतीं .पर दहेज़ के लालच में इन लड़कों ने उन लड़कियों की ज़िन्दगी नरक कर दी।

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    2. आज कल के लड़के क्या चाहते हैं ये तो भगवान् भी नहीं जानता। एक तरफ तो स्मार्ट लड़की चाहते हैं दूसरी तरफ लडकियां घर से बहार भी न निकलें। वेस्टर्न कपडें न पहने, दारू को तो हम भी बुरा मानते ही हैं। स्मार्ट लड़की को झेल भी नहीं सकते और चाहिए भी स्मार्ट ...व्हाट दी हेल इज दिस ??

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    3. रचना जी,
      मैं इस मामले को सिर्फ एकतरफा देखने के पक्ष में नहीं हूँ. लड़कियाँ तो खैर एकदम निर्दोष होती हैं क्योंकि उन्हें तो अपनी इच्छा व्यक्त ही नहीं कर सकतीं. लेकिन सारी गलती लड़कों की भी नहीं होती. माँ-बाप इमोशनली ब्लैकमेल करके शादी करवाते हैं. आजकल भी बहुत से लड़के हैं, जो अरेंज्ड मैरिज में विश्वास करते हैं और आज भी हमारे गाँवों में लड़की को देखने लड़का नहीं जाता. तो क्या दोनों ही माँ-बाप की ज़िम्मेदारी नहीं बनती कि वो बच्चों की रूचि और पढ़ाई-लिखाई के हिसाब से रिश्ता तय करें?
      गाँव की स्थिति बताऊँ आपको. लोग लड़कों को बाहर भेज देते हैं पढ़ने के लिए लड़कियों को नहीं भेजते. लेकिन चाहते हैं कि लड़की की शादी शहर में रहने वाले लड़के से हो. हमारे यहाँ बहुत से लोग लड़कियों को इसलिए बाहर नहीं भेजते कि दिल्ली जाकर लड़की कहीं बिगड़ न जाय. क्यों नहीं वो लड़कियों को भी वैसी ही शिक्षा देते जैसी लड़कों को. अगर नहीं तो किसी छोटे शहर में शादी क्यों नहीं करते. क्यों पैसे वाले लोग सोचते हैं कि दहेज देकर लड़का खरीद लेंगे.
      मेरा कहना ये है कि "इस समस्या को थोड़ा व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जाय." ये समस्या छोटी या ऊपर बताए हुए एक लड़के की नहीं है. माँ-बाप अगर बच्चों को बाहर पढ़ने भेज रहे हैं और उन पर विश्वास करके अरेंज्ड मैरिज कर रहे हैं तो माँ-बाप को भी चाहिए कि वो ये न समझें कि "एक बार शादी हो जायेगी, तो सब ठीक हो जाएगा"
      वो लड़का भी दोषी है, इस बात से मैं इनकार नहीं कर रही हूँ, लेकिन उसके माँ-बाप और लड़की के माँ-बाप भी उतने ही दोषी हैं. अगर कोई निर्दोष है तो वो लड़की... और हर बार लड़के भी दोषी नहीं होते. कभी इमोशनल ब्लैकमेलिंग करके शादी करा दी जाती है और कभी झूठ बोलकर.
      आप लोगों को पता नहीं कैसे लग रहा है कि आजकल झूठ बोलकर शादियाँ नहीं होतीं. बहुत कुछ बदला है. शादी का बाहरी रूप-रंग ज़रूर बदला है, लेकिन शादियाँ गाँवों में तय वैसे ही होती हैं, खासकर यू.पी. बिहार के गाँवों में. समस्या सिर्फ एक लड़के की मानसिकता की नहीं पूरी प्रोसेस की है.. जो शादी करने में आज भी अपनाई जाती है. मैं हमेशा किसी एक समस्या को व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखती हूँ, इसलिए मैंने ऐसा कहा. हर घटना अपने सामाजिक परिवेश से प्रभावित होती है उस परिवेश को बदलना होगा.

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  2. अब ये महाशय तालमेल नहीं बैठ रहा है..नहीं, कभी नहीं..जैसे शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं तो कोई क्या सुझाव देगा! ये तो तभी खुश होंगे जब इनको तलाक मिल जाये या पत्नी आत्महत्या कर ले। हनीमून ये मना ही चुके..पिता श्री दहेज की रकम ले ही चुके। :(

    वरना होना तो अब यह चाहिए कि जब शादी से पहले नहीं, नहीं कह सके तो अब सजा भुगतो। वो नहीं बदलती तो खुद को बदल डालो..तुम भी तो पत्नी की मर्जी से चल सकते हो। जब वह शराब नहीं पीती तो काहे पिला रहे हो? जब वह नहीं चाहती वेस्टर्न कपड़े पहनना तो काहे पहना रहे हो? खाना बनाना तो अनपढ़ लड़की भी सीख जाती है, साल छः महीने में। हो सकता है तुम कुछ विशेष शौक रखते हो जिसे उसने नहीं सीखा! जरा बना के सिखाना तो..

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  3. अक्‍सर मां बाप अपनी लडकियों की शादी के चक्‍कर में उन्‍हें इस तरह की मुसीबतों से घेर देते हैं। ऐसे में शादी एक अजाब की तरह ही बन कर रह जाती है....

    ...............
    इंटरनेट पर उपलब्‍ध 50 से अधिक ऑनलाइन मैग्‍जीन...

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  4. देवेन्द्र जी,
    ये समस्या सिर्फ इस लड़के की नहीं है. बहुत से ऐसे लड़के हैं, जो इतने डिमांडिंग नहीं होते और न ही पत्नी को बदलना चाहते हैं. मैंने ये समस्या बहुत करीब से देखी है. आप इस लड़के को कह सकते हैं कि ये खुद को बदल दे, लेकिन ऐसी नौबत ही क्यों आये कि किसी को किसी के लिए बदलना पड़े. हम और आप सभी लोग जानते हैं कि लड़कियों के घरवाले शादी में कितना झूठ बोलते हैं, क्या ये सही है. क्या शादी के लिए लड़का-लड़की दोनों का मासिक स्तर नहीं देखा जाना चाहिए?
    हाँ, अब शादी हो गयी है, तो निभानी पड़ेगी. क्योंकि हमारे समाज में तलाक इतना आसान नहीं है. लेकिन आज की पीढ़ी की समस्या को यूँ हलके में नहीं लेना चाहिए. ये दो जिंदगियों का सवाल है.

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    1. मुक्ति जी

      माँ बाप के गलती , और लडके के डरपोक पना की सजा लड़की को क्यों मिले , आप कहती है की जमाना बदल गया है , यदि यही बात है तो लड़के को पहले ही लड़की से मिल कर बात कर लेना चाहिए था , ( हा ये उसकी भी सफाई देंगे की लोगो ने मिलाने नहीं दिया ) आज तो विवाह के पहले लड़के लडकिय आराम से फोन पर बात करते है और जब एक ही शहर के हो तो खूब मिलते जुलते भी है , तब तो ये अच्छे बेटे की तरह माँ बाप की हर बात मानते रहे अब क्यों शिकायत कर रहे है । हमारे समाज में आज भी लडके ही लड़की को पसंद करते है लड़कियों के हा या न की पूछता ही कौन है लड़को को पहले ही इंकार कर देना था । अब देखिये की कहते है की उन्हें टीचर पत्नी नहीं चाहिए जबकि उन्हें पहले से ही पता था की लड़की बी एड है उसी से साफ जाहिर हो जाता है की लड़की क्या करना चाहती थी और अब उसकी शिकायत कर रहे है , क्या आप को इसमे नहीं लगता है की लड़का अब ज्यादा ही स्मार्ट बन रहा है । मै भी एक ऐसे ही घटिया लडके से मिल चुकी हूँ गांव के थे और बनारस में आ कर पढ़ने लगे और उन्हें बनारस जैसे छोटे शहर में भी इतनी हवा लग गई की गांव से गौने में जब पत्नी आई तो उसके भाई से अपने बेडरूम में लड़की के " ठन्डे व्यवहार " ( कसम से आज भी सोचती हूँ तो लगता है मेरे सामने आते तो अच्छे से उनकी धुलाई कर देती ) होने की शिकायत तक कर दी , उफ़ बेचारी लड़की अपने मायके जाने में भी शर्म महसूस कर रही थी । ऐसे डरपोक लोगो की गलतियों की सजा किसी लड़की को मिले मै इससे सहमत नहीं हूँ

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    2. सज़ा लड़की को तो बिल्कुल नहीं मिलनी चाहिए, लेकिन आज भी झूठ बोलकर रिश्ते कराये जाते हैं ये सच है. समस्या ये है कि घरवाले बच्चों को बाहर पढ़ने तो बेहज देते हैं, लेकिन शादी अपनी ही मर्ज़ी से करना चाहते हैं. मैंने ये कहा कि सिर्फ इस लड़के के मामले में समस्या को न देखा जाय. समस्या बहुत बड़ी है. जब माँ-बाप आत्महत्या की धमकी देकर शादी करा देते हैं, तो उस समय बच्चे कुछ नहीं कर सकते.
      हाँ, लड़कों की गलती तो है ही कि वो विरोध नहीं कर पाये, लेकिन फिर वही इमोशनल ब्लैकमेलिंग...जो माँ-बाप करते हैं.

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    3. मुक्ति जी

      हम सभी भी उसी समस्या की बात कर रहे है सभी ने एक ही बात कही है की उसे विवाह के पहले ही इंकार कर देना चाहिए था किसी ने नहीं कहा की उसे माँ बाप की मर्जी से विवाह कर उस निभाना चाहिए , लड़को क्या ये समस्या लड़कियों में उससे भी ज्यादा है , मै बनिया परिवार से हूँ जहा आप को लड़किया तो खूब पढ़ी लिखी मिल जाएँगी किन्तु घर का ही बिजनेस संभालने वाले लडके आप को पढ़े लिखे नहीं मिलेंगे नतीजा एक बड़ी संख्या में बेमेल विवाह होते है जहा लड़की खूब पढ़ी लिखी होती है और लड़का कई बार तो केव 7-8वी तक ही पढ़ा होता है , लड़कियों को तो बोलने का हक़ ही नहीं है किसी भी मामले में, किन्तु लडके तो खूब बोलते है और उनकी सुनी भी जाती है फिर समय रहते क्यों नहीं बोल। ये महाशय कहते है की वो ड्रिंक कर रहे है क्या माता पिता कहेंगे की ड्रिंक मत करो , आओ और गांव में हमारे साथ रहो नौकरी छोड़ दो तो क्या ये उनकी बात मान जायेंगे, दावे से कहती हूँ की नहीं मानेगे, फिर विवाह के समय कैसे माता पिता की बात मान गए , इसका मतलब है की इन्होने विवाह को बहुत ही हलके में लिया उसे ठीक से समझा नहीं , तो कैसे माना जाये की ये अब समझदारी से पत्नी को हैंडल कर रहे होंगे , जो मुर्खता नासमझी उन्होंने पहले दिखाई वही ये अब भी दिखा रहे है , ये सहानभूति के जरा भी पात्र नहीं है ।

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    4. तो कैसे माना जाये की ये अब समझदारी से पत्नी को हैंडल कर रहे होंगे ,



      अंशुमाला
      एक २८ वर्ष की महिला को कितना "हैंडल " किया जा सकता हैं और मुझे लगता हैं क्यूँ हैंडल करना चाहिये . उम्र के किस मकाम पर लडकियां खुद को हैंडल करना सीखेगी

      ये पी सी एस की तयारी कर सकती हैं लेकिन घर का खान पान नहीं बना सकती हैं { हम केवल समस्या जिस पक्ष की हैं उसकी बात करे } क्या २८ वर्ष की महिला खाना नहीं बना सकती
      शादी के एक साल के अन्दर तो कोई भी कुछ भी सीख सकता हैं
      बात बदलने की नहीं हैं बात हैं दिल्ली जैसे शहर में समंज्यस्य बिठाने की



      हम सब कब तक ये मान कर चलेगे की

      पत्नी को ट्रेन करना पति का काम हैं ???

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    5. जी नहीं पति या पत्नी को ट्रेंड करना किसी का काम नहीं है किन्तु दोनों में से कम से कम किसी को विवाह के बाद ये नहीं कहना चाहिए की मुझे ऐसी पत्नी चाहिए थी या ऐसा पति , यदि आप ने पहले नहीं बोल है तो या तो आप समझोता कीजिये या चीजो को खुद बदलिए , खाना बनाना सभी को आना चाहिए ये क्या बात हुआ , खाना बनाना आना चाहिए का क्या मतलब होता है , मै बहुत ही अच्छा खाना बना लेती हूँ जो एक बार खा ले तारीफ करता है किन्तु मेरे हाथ का खाना मेरे पति को ज्यादा नहीं भाता है उन्हें पनीर नहीं पसंद है उन्हें मेरा उत्तर भारत का मसालेदार खाना नहीं पसंद है क्योकि उन्हें वो रोज खाना पसंद नहीं था और न जाने क्या क्या तो मै बेकार हूँ मेरे पति को मुझे छोड़ देना चाहिए , विवाह के पहले बहुत सारी लड़किया खाना नहीं बनाती है बस थोडा बहुत जानती है विवाह के बाद जब वो ये काम रोज करना शुरू करती है तब कही जा कर वो चीजो को सिखना शुरू करती है , मुझे भी काफी साल लगे पति के पसंद के हिसाब से खाना बनाने में , कितनी ही बार उन्होंने मुझे सिखाया की वो कैसा कहना खाना चाहते है उन्हें कैसा पसंद है ,क्योकि यहाँ का वातावरण और खाने का तरीका दूसरा है , सालो लगते है खाने के तकनीक को समझने में , मै तो 11 वर्ष बाद आज भी नहीं कहा सकती हूँ की हा मै पाक कला में माहिर हूँ , बस जितना जानती हूँ वही बना सकती हूँ ।

      आप को याद होगा की मैंने एक बार आप से कहा था की मुझे भी रसोई में जाना और खाना बनाना नहीं पसंद है , और ये नापसंदगी आज तक है , और उसका असर और कई बार हमारे रिस्तो का असर भी कभी कभी खाने में आता है ।
      वैसे आप को बताऊ की मेरी फुफेरी बहन है बचपन से हास्टल में रही है आज इंजीनियरिंग कर चुकी है उसे तो इतना भी नहीं पता की किसी कलछुल कहते है और किसे पौना वो बस चाय और मैगी बनाना जानती है , तब तो उसका विवाह कभी नहीं होना चाहिए , क्योकि किसी लड़की को विवाह करने के लिए खाना बनाना आना सबसे जरुरी काम है ।

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    6. रही बात हैंडल करने की यही तो समस्या है की वो लड़की को अपनी मर्जी से हैंडल करना चाहते है उसे अपनी तरह जीने ही कहा दे रहे है ।

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  5. ऐसे कमबख्तों के कारण समाज बर्वाद हो चूका है , ये लोग शादी का अर्थ ही नहीं जानते कर्तव्य नाम तो शायद ही कहीं सूना होगा !
    वह बेचारी लड़की अब इन जानवरों के हवाले है ....

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  6. जब पहले स्टेप पर ही लड़खड़ा गये थे तो बाकी की सीढ़ी सोच-समझ कर चढ़नी चाहिए थी ना...

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  7. यहाँ पूरी की पूरी गलती इस लड़के की है। क्यूँ नहीं स्पष्ट रूप से अपने माता -पिता को उसने अपनी पसंद बतायी? क्यूँ नहीं लड़की से मिलने के लिए जोर डाला ?
    ये मैं पहले भी कई जगह कह चुकी हूँ, दहेज़ के लालच में ये लड़के बिलकुल श्रवण कुमार बन जाते हैं। शादी का निर्णय ,लड़की के चुनाव का निर्णय ,अपने माता -पिता पर छोड़ देते हैं। क्या शादी से पहले, पढने के लिए किसी चीज़ के लिए ,कहीं जाने के लिए उनलोगों ने अपनी पसंद नहीं बतायी होगी?? या फिर माता -पिता का विरोध नहीं किया होगा?? बाकी हर चीज़ों के लिए ये लड़के अपने माता -पिता से झगड़ लेते हैं, उनकी बात नकार देते हैं पर शादी के समय बिलकुल आदर्श बेटा बन जाते हैं।

    इन महाशय को ये नहीं पता था कि बलिया में पढ़ी हुई लड़की का अंग्रेजी ज्ञान कितना होगा? वहाँ ज्यादातर हिंदी मीडियम में ही पढाई होती है।
    और अब जब शादी हो ही गयी है , तो उसे हर वक़्त नीचा दिखाने, उसके काम में मीन-मेख निकालने पर वो लड़की क्या सीख पाएगी? यूँ ही दिल्ली जैसे शहर में अपने माता-पिता अपने रिश्तेदारों से दूर अकेले रहने पर उस लड़की का आत्मविश्वास हिल गया होगा। और बजाय इसके कि प्यार से उसे सम्मान देकर उसका सेल्फ कॉन्फिडेंस बढायें ये लड़का उसमें हीन भावना भर रहा है। ऐसे में तो वो लड़की जो कुछ जानती है, वो भी भूल जायेगी ,नया कहाँ से सीख पाएगी? माइक्रो वेव और वाशिंग मशीन क्या डिश वाशर चलाना भी कोई बड़ी बात नहीं। गाँव से आयी, अंगूठा छाप ,झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाली काम वाली बाइयां भी ये सब मिनटों में सीख जाती हैं। बशर्ते कोई उनके सर पर खड़ा होकर उन्हें नीचा न दिखाए और उनका मजाक न उडाये . इस पत्र में जो भी उस लड़के ने लिखा है, उस से परिलक्षित हो रहा है कि उसके मन में लड़की के लिए किस तरह की भावना है, और अपनी पत्नी के साथ उसका व्यवहार कैसा होगा ??

    अब सिर्फ एक ही उपाय है, वह लड़का उस लड़की की सिर्फ आलोचना करने की जगह उसकी जगह पर खुद को रख कर देखे कि 28 साल तक बलिया जैसी छोटी जगह में रहने, हिंदी मीडियम में पढ़ाई करने के बाद अचानक दिल्ली में आकर वहाँ के रंग-ढंग में ढलना और अंग्रेजी में बातें करना कितना मुश्किल होगा ( वैसे आयम श्योर ,वो लड़का भी कोई बहुत अंग्रेजीदां नहीं होगा, पर उसकी गलती निकालने को उसके सामने कोई नहीं खडा न ) बस प्यार और संयम से ही काम लेना होगा, उस लड़की में आत्मविश्वास जगान होगा , फिर दो वर्षों में ही वो लड़की ऐसी ट्रान्स्फोर्म हो जायेगी कि वो लड़का भी उअस्का पिछला रूप भूल जायेगा।
    पर ऐसा होता नहीं, इतना धैर्य और संयम लड़कों में नहीं होता और वे खुद को बेचारा दिखाने, अपनी पत्नी को कोसने का ही काम करते हैं। उन्हें सैडिस्टिक प्लेज़र भी मिलता है, इसमें . साल दर साल गुजर जाते हैं और न लड़की को पति का प्यार मिलता है, न पत्नी का प्यार पाने के लिए लड़का कोई प्रयास ही अकर्ता है। हाँ ,पत्नी उस से ताउम्र डरती रहती है।
    एक जगह भी इस लड़के ने यह नहीं लिखा कि उसने अब तक अपनी पत्नी से शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनाए हैं। इसमें उस लड़की का गंवारपन आड़े नहीं आया ? बच्चे भी हो जायेंगे ,वे बड़े भी होंगे और अपने पिता को अपनी माँ की इज्जत न करता देख, वे भी माँ का सम्मान नहीं करेंगे . भुक्तभोगी सिर्फ लड़की होती है।

    लड़की के माता -पिता तो चाहते ही हैं किसी तरह अपना बोझ उतारें ,पर इसमें उस लड़की का क्या कसूर। और वे क्यूँ इजाज़त दें कि उनकी बेटी ससुराल में रहकर सास-ससुर की सेवा करे और दामाद ,दिल्ली में अफेयर रखे।

    @अपनी एक जानकार के यहाँ मैने अपनी पत्नी को नौकरी पर रखवा दिया हैं . मुझे स्कूल टीचर अपनी पत्नी नहीं चाहिये , कभी नहीं .

    'रखवा दिया है ' "नहीं चाहिये , कभी नहीं " जैसी भाषा ही बता रही है कि उस लड़के का मानसिक स्तर कैसा है? जैसे उसने एक जीती जागती लड़की से नहीं एक सामान से शादी की है।
    पत्नी को वह एक इंसान नहीं अपनी जायदाद समझता है। कभी पत्नी से भी पूछ कर देखे, उसे अपने पति की कौन कौन सी बातें अच्छी नहीं लगती। अपने पति की कई सारी बातें उसे भी पसंद नहीं आती होंगी पर उसने एडजस्ट कर लिया होगा।

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  8. जैसा की देवेन्द्र जी ने कहा है की लड़का हनीमून मना चूका है और पिता जी दहेज़ चट कर चुके है , अब लडके की बातो से लगा रहा है की वो अपनी पत्नी को पूरी तरह से पागल घोषित करने पर तुला है ।

    सबसे पहले गलती लडके की है की उसने पहले ही क्यों नहीं अपने माता पिता से कहा की उसे कैसी लड़की चाहिए और जब उसे खास तरीके की ही लड़की चाहिए थी तो उसे विवाह के पहले ही लड़की से अच्छे से बात कर लेना था उससे उसे पता चल जाता की लड़की कैसी है , माता पिता से अपनी बात कहने की हिम्मत नहीं हुई किन्तु आज पत्नी को छोड़ने की हिम्मत बड़ी आसानी से आ जा रही है , उनकी जिंदगी ऐसी लड़की से शादी करके बर्बाद हो गई है कभी सोचा है की उस लड़की का जीवन कैसे गुजर रहा होगा जिसका पति उसे अनपढ़, गवार समझ रहा है और दूसरो के सामने उसे लगभग पागल घोषित कह रहा है , मुझे पता नहीं था की आज के लड़को को विवाह के लिए एक जीवन संगनी से ज्यादा दुनिया को दिखाने के लिए एक शो पिस की जरुरत होती है , दोस्तों के सामने नहीं ले जा सकते है समझ आती है किन्तु अकेले घुमने भी नहीं ले जा सकते है क्या लड़की इतनी पागल है । जब खुद अपने माता पिता के सामने अपनी बात कहने की हिम्मत इन्हें नहीं हुई तो लड़की को साथ रखने की जिम्मेदारी इनकी होती है आप उसे नहीं छोड़ सकते है जिस समज से लड़की आ रही है वह यदि लडके ने उसे तलक दे दिया तो उसका जीवन तो पूरी तरह से ही बर्बाद हो जायेगा । वैसे जहा चाह वहा राह दिल्ली जैसे शहर में रह रहे है जहा स्पिन्किंग इंग्लिश से ले कर प्रस्नाल्टी डेवलपमेंट तक के कोर्स होते है , किन्तु वो ये भी नहीं करवाएंगे वो तो पहले ही कहा चुके है की वो निपट गावर है कुछ नहीं सिख सकती है । साफ है की उनकी पूरी इच्छा उससे छुटकारा पाने की है , इसलिए इन्हें कोई भी उपाय बताना बेकार है , ये कुछ भी नहीं समझने वाले है ।

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  9. मुक्ती जी,

    बात आज के संदर्भ में है। गलती तो सोलह आने माँ बाप की है जो उन्होने दोनो की मानसिक स्थिति से सामंजस्य नहीं बैठाया। झूठ बोलकर शादी कर दी। लड़का विरोध नहीं कर पाया। यह स्थिति तो आनी ही नहीं चाहिए थी। लेकिन अब जब गलती हो चुकी तो सजा भी भुगतना पड़ेगा। दोनो को कष्ट होगा तो दोनो के माता-पिता को कष्ट होगा। गलती की सजा तो दोनो ही परिवार को मिल ही रही है। जब हमारे समाज में तलाक आसान नहीं है तो फिर तालमेल के अलावा क्या चारा शेष है? जबरदस्ती लड़की को तैयार किया ही नहीं जा सकता। अब सबकुछ लड़के के मन का नहीं हो पायेगा। इस सत्य को जितनी जल्दी स्वीकार कर लिया जाय उतना अच्छा है। अपना और अपने माता-पिता का अपराध स्वीकार कर लेने से दोनो ही पक्ष को प्रायश्चित करने में आसानी होगी और दोनो एक दूसरे के अनुसार खुद को ढाल सकेंगे। यहाँ एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि हम सुझाव तो दे रहे हैं मगर वहाँ जहाँ केवल एक पक्ष की बात ही सामने है। ऐसे में सही निर्णय पर पहुँचना कठिन है।

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  10. मेरे सारे कमेन्ट स्पैम में गए :(

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  11. वाह वाह !!
    शादी करेंगे बलिया में और चाहेंगे लड़की लन्दन वाली । अभी इतना किसीम का फरमाइश जो कर रहे हैं बाबू साहेब उसी समय काहे नहीं किये अपने बाप के सामने। सब हिम्मत बीवी के सामने ही दिखाने का बनता है ना !!
    कैसे कह सकते हैं कि लड़की के घरवालों ने झूठ ही कहा। लड़की की क्वालिफिकेशन सही है। लड़की फॉरवर्ड नहीं है इसका मतलब ये नहीं कि झूठ कहा गया है। दुनिया में अलग-अलग तरह के लोग होते हैं, कोई मेट्रिक फेल होकर भी वाचाल होता है और कोई पी एच डी होकर भी अंतर्मुखी। ये बाबू साहेब बिहार के एक पिछड़े इलाके की लड़की से बहुत ज्यादा उम्मीद लगाए बैठे हैं। जहाँ तक खाना बनाने का सवाल है ये ज़रूर कमी है लड़की में। लेकिन अंग्रेजी नहीं बोलना, दारू नहीं पीना, विदेशी कपडे नहीं पहनना, ये कोई कमी नहीं है। जब किसी ने सारी उम्र ये काम किया ही नहीं है तो कैसे कर लेगी वो। अगर जो ये सब करती तो यही कहता कि ये इतनी फॉरवर्ड है कि हमसे झेला नहीं जा रहा है। और तो और यही सब काम आज अगर कोई लड़की करे तो देखिये कैसा डंका बजता है उसके नाम का। तब हो जाएगा सारा दोष उसी लड़की का। ऐसे कपडे पहनती है, दारू पीती है। वाह रे दुनिया ! औरत के लिए कहीं गुजारा नहीं है, एक तरफ ये कहा जाता है लडकियां बहुत स्वछन्द हो गयीं हैं, और अगर कोई हाथ पाँव समेत कर बैठे तो, बहुत गंवई है। आखिर क्या चाहते हैं लोग ???????????????

    मेरे हिसाब से इस लड़के से ये पूछना चाहिए, कि उसके परिवार की बाकी औरतें भी क्या वैसी ही रहतीं हैं जैसा वो चाह रहा है ?? अगर हाँ तो उनकी संगत में कुछ दिन अपनी बीवी को रखे ताकि वो इन बातों में पारंगत हो जाए। यही एक निदान है, वरना खुद को बदले ...इडियट कहीं का !

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  12. स्पैम में कमेंट जाने से ऊपर वाला कमेंट बाद में आयेगा और लोगों को लगेगा कि नीचे वाले ने उपर वाले का पढ़कर लिखा है। :)

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  13. वाह वाह !!
    शादी करेंगे बलिया में और चाहेंगे लड़की लन्दन वाली । अभी इतना किसीम का फरमाइश जो कर रहे हैं बाबू साहेब उसी समय काहे नहीं किये अपने बाप के सामने। सब हिम्मत बीवी के सामने ही दिखाने का बनता है ना !!
    कैसे कह सकते हैं कि लड़की के घरवालों ने झूठ ही कहा। लड़की की क्वालिफिकेशन सही है। लड़की फॉरवर्ड नहीं है इसका मतलब ये नहीं कि झूठ कहा गया है। दुनिया में अलग-अलग तरह के लोग होते हैं, कोई मेट्रिक फेल होकर भी वाचाल होता है और कोई पी एच डी होकर भी अंतर्मुखी। ये बाबू साहेब बिहार के एक पिछड़े इलाके की लड़की से बहुत ज्यादा उम्मीद लगाए बैठे हैं। जहाँ तक खाना बनाने का सवाल है ये ज़रूर कमी है लड़की में। लेकिन अंग्रेजी नहीं बोलना, दारू नहीं पीना, विदेशी कपडे नहीं पहनना, ये कोई कमी नहीं है। जब किसी ने सारी उम्र ये काम किया ही नहीं है तो कैसे कर लेगी वो। अगर जो ये सब करती तो यही कहता कि ये इतनी फॉरवर्ड है कि हमसे झेला नहीं जा रहा है। और तो और यही सब काम आज अगर कोई लड़की करे तो देखिये कैसा डंका बजता है उसके नाम का। तब हो जाएगा सारा दोष उसी लड़की का। ऐसे कपडे पहनती है, दारू पीती है। वाह रे दुनिया ! औरत के लिए कहीं गुजारा नहीं है, एक तरफ ये कहा जाता है लडकियां बहुत स्वछन्द हो गयीं हैं, और अगर कोई हाथ पाँव समेत कर बैठे तो, बहुत गंवई है। आखिर क्या चाहते हैं लोग ???????????????

    मेरे हिसाब से इस लड़के से ये पूछना चाहिए, कि उसके परिवार की बाकी औरतें भी क्या वैसी ही रहतीं हैं जैसा वो चाह रहा है ?? अगर हाँ तो उनकी संगत में कुछ दिन अपनी बीवी को रखे ताकि वो इन बातों में पारंगत हो जाए। यही एक निदान है, वरना खुद को बदले ...इडियट कहीं का !

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    1. I don't think this guy is true in saying that his wife doesn't know how to cook . It is reflecting from his complaint that he may be expecting other kind of recipes to be cooked for him . Like Russian pasta or Italian Pizza or Chinese veg rolls. Its not at all ( less than 5 % ) possible for a 28 years old girl belonging from a small town unaware of cooking. As per his life style is depicted it seems he is not the one who eats paratha , sabji , rice in his meals .

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  14. इतना सारा घपला देख कर एक आईडिया आ रहा है दिमाग में ...क्यों नहीं शादी से पहले ही लड़के वाले या लड़का, लड़की को एक मैन्युअल बना कर दे देते हैं, कि लड़की फलाना-फलाना रंग रूप में रहना है, ये-ये करना है। अगर पहले से मालूम हो तो कम से कम लड़की प्रैक्टिस तो कर लेगी और ई नौटंकी तो नहीं होगी कम से कम ...x-( x-( x-( x-( x-(

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  15. .
    .
    .
    मेरी समझ में वह लड़का भ्रमित है, एक गलत इमेज है उसके दिमाग में पत्नी की, वरना नौकरी न करना, अंग्रेजी न बोल पाना, टैक-सैवी न होना, ड्रिंक न ले पाना आदि आदि कोई मुद्दे ही नहीं होते... कुछ दिन दिल से साथ तो रहें दोनों...प्यार भी करने लगेंगे एक दूसरे से...

    पर उस लड़के की बातों से लग रहा है कि जनाब एक एस्केप-रूट खोज रहे हैं... कायर है वह, कहीं अपनी कायरता के चलते लड़की को नुक्सान न पहुंचा दे...


    ...

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  16. बड़ी अजीब बात है। आज कल के लड़के पत्नी नहीं फर्ल्ट करने वाली लड़की चाहते है। वैसी जो शराब परोस सके, दोस्तों के साथ फर्ल्ट करें, बॉस के साथ फर्ल्ट करें। उफ अजीब लगता है पढ़कर।
    बेचारे मृगमारिचका में जी रहे है जब प्यास से मरने लगेगें तो यही पत्नी काम देगी इनको नहीं पता.................

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  17. यह एक तरफा केस है, लड़के ने अपनी बात लिखी है जो पता नहीं कितनी सच है और कितनी झूठ। इसलिए जब तक लड़की का पक्ष सामने नहीं हो, कोई भी राय कायम करना जल्‍दबाजी ही होगी।

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  18. इस ईमेल प्राप्त पत्र को यहाँ देने का मकसद इतना ही था की हम देख सके की नयी पीढ़ी कितनी दुविधा में हैं , क्या इसके लिये वो अकेली ही जिम्मेदार हैं ? ये समस्या एक बहुत व्यापक समस्या हैं जैसा मुक्ति ने कहा की दहेज़ से लड़का खरीदा जाता हैं / बेचा जाता हैं और आज भी अभिभावक अपने बच्चो का विवाह अपनी समझ और पसंद से करते हैं क्युकी उनको लगता हैं "बच्चो को क्या समझ " ?

    इसके अलावा जैसा अंशुमाला ने कहा पर्सनैलिटी दवलोप करने के कोर्स करवा दिया जाए , पर इसके लिये पैसा कौन देगा ? दहेज़ का पैसा लडके के अभिभावक के पास हैं जैसा लडके ने कहा

    आप के कमेन्ट के बाद आ बा सा की मेल मिली है


    " आप सब के कमेन्ट का धन्यवाद , चलिये साड़ी गलती मेरी ही सही , मै एक लड़की के प्रति सहिष्णु नहीं हूँ क्युकी मेरी अपनी पत्नी से कुछ उम्मीदे थी , मुझे शादी के समय बताया गया था की मेरी होने वाली पत्नी घर के हर काम में दक्ष होते हुए भी अपनी क़ाबलियत से पी सी एस की तयारी कर रही हैं . वो घर का हर काम सुगमता से कर सकती हैं . लेकिन वो तो कुछ भी नहीं कर पाती हैं . मैने अपनी होने वाली ससुराल में पहले ही कह दिया था की मुझे स्कूल में नौकरी नहीं करवानी .

    एक बात जो मैने पहली मेल में नहीं लिखी की मै मंगली था और मेरे अभिभावक अब कहते हैं तुम्हारा विवाह हो नहीं रहा था इस लिये हमने यहाँ करवा दिया .

    मुझे लगता हैं अपने और अपनी पत्नी को देख कर की हमारा जीवन नष्ट हो चुका हैं . मै अहम फैसला ले चुका हूँ की मै किसी को जन्म नहीं दूंगा . क्या मै अपना ये फैसला अपने अभिभावक और ससुराल वालो को बता दूँ और फिर उनके फैसले का इंतज़ार करूँ या चुप ही रहूँ ,जैसे रहता आया हूँ ? "

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    1. ये तो गलत बात है कि कि वो किसी को जन्म नहीं देगा. आखिर उससे ब्याही लड़की की भी तो कोई इच्छा है. जैसा कि मैंने ऊपर भी कहा था कि समस्या बहुत व्यापक है. चाहे जिस तरह से ज़बरदस्ती शादी की जाय, नुकसान हमेशा बेचारी लड़की का सबसे ज्यादा होता. लकड़े कम से कम शादी के बाद भी कह सकते हैं कि उन्हें लड़की उनकी मंसपसंद नहीं मिली, लेकिन लड़की तो ये भी नहीं कह सकती.
      मुझे इस विषय में समाधान यही समझ में आ रहा है कि इन्हें किसी मैरिज काउंसलर से मिलना चाहिए, जो लड़का-लड़की दोनों की ही बात सुनकर कुछ सुझाव दे सके.
      अब अगर शादी से पहले लड़का अपनी इच्छा जाहिर नहीं कर पाया है और ये माँ-बाप पर छोड़ दिया कि वो जैसी चाहे, लड़की से ब्याह दें, तो अब निभाना तो पड़ेगा. आखिर अरेंज्ड मैरिज में यही तो पहले से सोचा जाता है कि शादी के बाद एडजस्टमेंट हो ही जाएगा. तो अब सामंजस्य करना ही पड़ेगा. इनको सोचना चाहिए कि भले ही इनकी कोई गलती न हो, लेकिन उस लड़की की भी कोई गलती नहीं है. हमारे यहाँ शादी की प्रक्रिया ही ऐसी है. आप अपने माँ-बाप को दोष से सकते हैं, समाज को दोष दे सकते हैं, लड़की के माँ-बाप को दोष दे सकते हैं, शादी में मध्यस्थता करने वालों को कोस सकते हैं, लेकिन लड़की को कोई दोष नहीं दे सकते, क्योंकि इस पूरे घटनाक्रम में लड़की की इच्छा के बारे में एक बार भी नहीं सोचा जाता.

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    2. तुम तो ऐसे कह रहे हो जैसे दुनिया का ही अंत हो गया है ! कहीं कुछ भी नष्ट नहीं हुआ है। तुम क्या सोचते हो हम सब ऐसे ही पैदा हुए थे, जैसे आज हैं। बिलकुल नहीं, हम आज जो भी हैं, वो हम भी कल नहीं थे और आज जो हैं, वो कल नहीं होंगे। हमने भी बहुत कुछ समय के साथ सीखा है । और हर दिन सीख ही रहे हैं, हमको इस क़ाबिल बनाने में हमारे पति देव का बहुत हाथ है। आज भी हम रोज़ उनसे लड़ते हैं, लेकिन हर दिन उनसे सीखते भी हैं।

      हम खुद भी बिहार के हैं और ऐसे ही परिवार से आते हैं, जहाँ वेस्टर्न ड्रेस, दारू, मेकअप के बारे में हम सोच भी नहीं सकते थे । कभी ये सब न सुने थे न देखे थे। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है जो असंभव है। आज हम बड़े-बड़े मिनिस्टर से ऐसे बात करते हैं जैसे वो बहुत साधारण सा इंसान हो।

      एक बात जान लो, इस दुनिया में सबकुछ हो सकता है, अगर ठान लो तो। सबकुछ वैसा ही हो सकता है जैसा तुम चाहते हो (अगर तुम सचमुच चाहते हो)| शादी ही क्यूँ दुनिया का हर रिश्ता समझौता ही होता है, जब तुम अपने माँ-बाप से समझौता कर सकते हो, तो फिर अपनी पत्नी से क्यूँ नहीं। थोडा तुम बदलो थोडा वो बदले और सबकुछ ठीक हो जायेगा। अपनी पत्नी से अपने भविष्य की बातें करो, उसका उत्साह बढाओ, उसे संबल दो। बदले में वो भी तुम्हारा साथ देगी।

      आज तुम सोच रहे हो कि बच्चे नहीं होने चाहिए, लेकिन हमेशा तुम ऐसे ही नहीं रहने वाले हो, एक दिन जब तुम उम्र की शाम में पहुंचोगे, तुम्हें उनकी कमी खलेगी और तब देर हो चुकी होगी। अपने आप, या किसी दूसरी परिस्थिति में बच्चे का नहीं होना फिर भी इंसान झेल जाता है लेकिन जानते-बूझते हुए उनको दुनिया में आने ही नहीं देना, इंसान को साल कर रख देता है। बच्चों को पाल-पोस कर बड़ा करना अपने आप में एक उपलब्धि होती है, साथ ही बच्चे सेतु होते हैं जिनसे माँ-बाप जुड़े रहते हैं। हम तो यही कहेंगे, खुद को समेटो, जीवन के बहाव के साथ चलो। याद रखो लहरों के साथ चलोगे तो कहीं न कहीं पहुँच ही जाओगे, वर्ना जीवन से लड़ते रह जाओगे।

      ईश्वर तुम्हें शक्ति, और समझ दे ताकि तुम सही फैसला कर सको। अभी तो जीवन की शुरुआत ही हुई है, अभी से हार मान जाओगे तो सफलता के सोपान पर कैसे चढोगे ??? हिम्मत से ज्यादा अपनी अक्ल से काम लो। याद रखो माँ-बाप ने तुमसे ज्यादा जीवन देखा है, उनके अनुभवों से लाभ उठाओ। जहाँ तक मैं समझती हूँ, कोई माँ-बाप अपनी औलाद का बुरा नहीं चाहते, अपनी समझ से उन्होंने जो भी तुम्हारे लिए तय किया है, तुम्हारा और तुम्हारे परिवार का भला सोच कर ही किया है। हो सकता है तुम्हारी पत्नी बुद्धू हो लेकिन बुरी नहीं है, इतना हमें भी लग रहा है। बुरे होने से बुद्धू होना बेहतर होता है। अगर कोई ऐसी मिलती जो बुद्धू नहीं बुरी होती तो ??? उसमें कुछ तो अच्छाई होगी। तुम उसकी अच्छाईयों को देखना शुरू करो, तुम्हें खुद ही लगेगा, इतने दिन तुमने कितने सारे अच्छे पल गवां दिए। इसलिए ईश्वर का धन्यवाद करो और ऊपर वाले के आशीर्वादों को गिनो। जीवन बहुत खूबसूरत है, ज़रुरत है उस खूबसूरती को देखने की। अब फटा-फट एक फैसला लो कि तुम सबकुछ बदल दोगे, अपनी इस बेवकूफी भरी सोच को, खुद को भी और अपनी श्रीमती को भी लेकिन धीरज और प्यार से। हमसब की दुआएं तुम्हारे साथ हैं।
      हमेशा खुश रहो !

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    4. @ इसके अलावा जैसा अंशुमाला ने कहा पर्सनैलिटी दवलोप करने के कोर्स करवा दिया जाए , पर इसके लिये पैसा कौन देगा ? दहेज़ का पैसा लडके के अभिभावक के पास हैं जैसा लडके ने कहा

      रचना जी

      मै आप के इस कथन की घोर निंदा करती हूँ , क्या विवाह के बाद भी लड़की की सारी जिम्मेदारी उसके घर वालो की ही होगी , यदि लड़की बीमार पड़ जाये या उसे पैसे की जरुरत हो , तो क्या उसके लिए उसके परिवार वाले पैसे देंगे , तब तो ये कल को कहेंगे की भाई लड़की को खिलाने पिलाने रखने के पैसे भी ससुराल वाले दे क्योकि दहेज़ का पैसा तो मेरे पिता जी ने रख लिया , तो जा कर अपने पिता जी से ले पैसे, जो असल में लड़की का पैसा है । पत्नी को शराब पिलाने, पश्चिमी तरीके के कपडे पहनाने, दोस्तों के साथ पार्टी करने के लिए उनके पास पैसे है किन्तु पत्नी को कोई कोर्स कराने के लिए इनके पास क्या पैसे नहीं है ( हा अक्ल और मन नहीं है ये तो पता है ) । वो तो पत्नी है आप कोई सामान भी लीजिये तो उसे अपने हिसाब से ढालने के लिए आप को अपने जेब से पैसे देने होते है चाहे मकान लीजिये या गाड़ी और ये तो पत्नी है उसकी तो क़ानूनी और सामाजिक जिम्मेदारी आप की बनती है । आप की बात से बिलकुल असहमत हूँ की पैसे कौन देगा , विवाह के बाद पत्नी की सारी जिम्मेदारी पति की होती है लड़की के घरवालो की नहीं । मेरी माँ की धडी हुई थी तब वो सिर्फ 10 वी पास थी ससुराल आ कर उसने 12वी और बी ए किया उसका पैसा मेरे दादी ने खर्च किया था मेरे नाना से लेने नहीं गए थी जबकि इच्छा मेरी माँ की थी , मैंने मुंबई आ कर एम ए सिर्फ मुंबई को जानने के लिए कर लिया था उसके पैसे मेरे पति ने दिए थे अपने घर से मै नहीं लाइ थी ।





















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    5. मै आप के इस कथन की घोर निंदा करती हूँ , क्या विवाह के बाद भी लड़की की सारी जिम्मेदारी उसके घर वालो की ही होगी , यदि लड़की बीमार पड़ जाये या उसे पैसे की जरुरत हो , तो क्या उसके लिए उसके परिवार वाले पैसे देंगे

      anshumala

      कानून कहता हैं की
      पति की संपत्ति के अलावा पत्नी का ससुराल की किसी चीज़ पर कोई हक़ नहीं हैं
      दहेज़ सास ससुर के पास हैं
      पति खर्चना नहीं चाहता
      अब क्या बेटी को मायके से भी नहीं मिलेगा

      क्या बेसिक बात ही नहीं ख़तम होगयी जहां हम सब कहते आये हैं की लड़की को पराया धन ना कहे

      अगर बेटे को जरुरत होगी अपने को देव्लोप करने की तो वो माँ पिता से ले सकता हैं
      लेकिन बेटी ब्याह दी तो बस उसका अधिकार ख़तम ??

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    6. किस काम के लिए पैसे कौन खर्च करेगा, इसका कोई सेट रुल नहीं हो सकता, न ही ऐसी बातों को जेनेरलाइज नहीं किया जा सकता है, ये तो हर परिवार के अपने निजी परिस्थिति की बात है। साधारणतः बिमारी, पढाई, गाडी, मकान जैसे खर्चे अपने ही होते हैं, हर परिवार के। ऐसे हर खर्चे के लिए लोग एक-दूसरे का मुंह देखने लगे फिर तो हो गया काम। घर-परिवार दूसरों के भरोसे नहीं किये जाते।
      जहाँ तक संपत्ति में बेटी के अधिकार की बात है, वो बिलकुल अलग मुद्दा है और उस अधिकार से उसे वंचित नहीं किया जा सकता, उसमें बेटी का हक है (अगर बेटी चाहे तो), भारत का कानून भी यही कहता है।

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    7. घर-परिवार दूसरों के भरोसे नहीं किये जाते।
      अदा
      परिवार का अर्थ अगर पति पत्नी की इकाई हैं तो फिर लड़की के घर से जो कुछ आया था वो "इस परिवार " को मिल जा ना चाहिये था
      नहीं वो नहीं मिला हैं यानी वो "लडके के विवाह से पहले वाले परिवार यानी उसके अभिभावक " के पास हैं

      अब यही तो समस्या की शुरुवात यहाँ पर हैं जैसा मुक्ति ने कहा की बच्चो को स्वाबलंबी बना दिया पर विवाह उनका अपनी समझ और अपनी सोच से किया और विवाह के खर्चे और आदान प्रदान के विषय में जो "नया परिवार " बना रहे हैं उनको नहीं बताया .

      अब अगर इनकी पत्नी कोई ग्रूमिंग कोर्से करना भी चाहे तो शायद 20 -30 हज़ार रूपए लगे , इतना की कम से कम कुकिंग इत्यादि सीखने में लगेगा या अगर उसको २ साल का कोई प्रोफेशनल कोर्से करवा दिया जाये तो भी साल भर की फीस काफी होंगी वो खर्च कौन देगा

      लड़की का पिता की प्रॉपर्टी में हिस्सा होता हैं , लेकिन वो अभी तो नहीं मिलेगा , वो तो पिटा की संपत्ति के बटवारे के समय मिलेगा
      लडके के पिता का भी जो हैं वो उनके बच्चो का ही हैं पर कब मिलेगा जब पिता नहीं होंगे

      उस दौरान इनकी दूरी इतनी बढ़ चुकी होंगी की बच्चे होने या ना होने से क्या फरक पड़ेगा ??

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    8. पहली बात यहाँ तो मामला ही अलग है, लड़के की शादी नहीं हो रही थी, क्योंकि वो मंगला है ...मतलब ये कि इससे शादी करके लड़की ने उसपर अहसान ही किया है।

      दूसरी बात, अगर रिसोर्सेस लिमिटेड हैं तो एक्सपेक्टेशन भी लिमिटेड होनी चाहिए।
      अगर इस लड़के की ये औकात नहीं की वो कोर्स करवा सके तो फिर इतनी बड़ी-बड़ी उम्मीद अपनी बीवी से क्यों लगाए बैठा है ? बीवी के भरोसे अनाप-शनाप सपने देखना, ये तो गज़ब बात है । ये सब टीम-टाम इसकी इच्छा है, लड़की की नहीं। तो उनको पूरा करने की जिम्मेदारी सिर्फ उसकी है, ये न तो लड़की की है न ही लड़की के माँ-बाप की। बलिया जैसी जगह में शादी कर रहा है ये उसे पहले से मालूम था। उसे मालूम था की उसे एक बहुत ही साधारण सी लड़की मिलने वाली है, जो बी .एड . भी है, आज कल टीचर्स की तनख्वाह बहुत अच्छी है, और यह एक अच्छा काम भी है। वैसे भी बिहार का हर बच्चा आई ए एस बनने का ख्वाब ज़रूर देखता है, इस लड़की ने भी देखा होगा। कॉम्पिटिशन की तैयारी करना और कम्पीट करना दोनों अलग बातें हैं। कम से कसम इस लड़की में इतनी हिम्मत तो हुई की वो इस कम्पीटीशन में बैठी, और ये बाबू साहेब अपने दारू का खर्च अपनी बीवी की कमाई से निकालना चाहते हैं ??? वो क्यूँ नहीं ऐसी ही कोई कोशिश करता है ताकि कुछ बने और खुद वो सब हासिल करे जो वो चाहता है, और अगर ये लड़की 2nd एटेम्पट में परीक्षा पास ही कर लेती तो क्या इस लड़के से उसकी शादी होनी चाहिए थी ???

      जिस लड़के की पसंद इतनी महंगी है, जो ऐसे लोगों के साथ उठता बैठता है, जो सो कॉल्ड हाई सोसाईटी हैं, तो उसकी कमाई भी उतनी होनी ही चाहिए। इनको सबकुछ पका-पकाया मिलना चाहिए, खुद कुछ नहीं करेंगे। वाह जी वाह !!
      जो दहेज़ इसको दिया गया है, अपने बाप से कहे की मुझे चाहिए, ये हिम्मत क्यूँ नहीं है उसको। ये सामन वैसे भी उस लड़की का है, और लड़की के पास होना चाहिए ये सामान।
      ये तो बड़ी अच्छी बात रही, शादी लड़की उस लड़के से करे जो मंगली है, सामान भी लाये और अब कोर्स का भी खर्च करे, नौकरी भी करे, कॉम्पिटिशन भी दे, पास भी करे, घर का सार काम भी करे, रूपया कमा कर ढेर लगा दे, और ये बस बड़े-बड़े ख्वाब देखे। सबकुछ लड़की ही करे तो फिर ये लड़का क्या करे, बस फरमाईश की फेहरिस्त पकडाते जाए ....क्या बात है ...
      हम ये जानना चाहते हैं इस लड़के की क्या क़ुअलिफ़िकेशन है और ये करता क्या है?? इसका घर कैसा है ??? ये है कौन ??? ये पात्र कैसा है ??

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    9. एक तरफ वो खुद को मंगली कहता है, और दूसरी तरफ बीवी से दारू पीने की उम्मीद भी करता है ...बड़े ही कोक्टेली विचार हैं इसके :)
      ये कोई बहुत ही कन्फ्यूज्ड प्राणी है, अब तब तक हम इसपर हम अपना समय बर्बाद नहीं करेंगे, जब तक ये नहीं मालूम चलेगा ये कितना पढ़ा लिखा है, इसकी तनख्वाह क्या है, ये नौकरी क्या करता है, इसका परिवार कैसा है, वैगरह-वैगरह....क्यूंकि हर घर की परिस्थिति अलग होती है, एक ही पक्ष की बात सामने रखी जा रही है, वो भी अधूरी जानकारी है अब तक । ऐसा लग रहा है जैसे नींद से उठ कर किसी को कोई आईडिया आया और उसने रचना जी को ईमेल कर दिया। दुसरे पक्ष की कोई बात हम नहीं जान रहे हैं। पूरी इन्फोर्मेशन के बिना हम लोग सिर्फ अटकल पर बात कर रहे हैं। इसलिए मेरी तरफ से बस इतनी ही बात कहनी थी मुझे।

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    10. ada
      he has already said he is a MCA

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    11. ABC says , his parents say that since he was mangli it was difficult for them to find a match for him

      i then presumed it might have been equally difficult for the girls parents who is is married to him


      an MCA in delhi gets anywhere between 40000 - 60000 depending on experience { i have no personal info about his salary }

      i published the mail because i have seen this problem surfacing time and again

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    12. रचना जी

      लड़की हुई की पिंक पाल बॉल हो गई पति कहे की जाओ अपने मायके से लेकर आओ वहा तुम्हारा हिस्सा है उसे लेकर आओ मै क्यों तुम्हारी जिम्मेदारी लू , पिता कहे की जितना तुम्हारा हिस्सा बनता था वो तो हम तो दान दहेज़ दे चुके , ससुराल से पुछू , ससुराल वाले कहे की जो दान दहेज़ मिला था वो तो तुम लोगो की शादी गहनो में ही खर्च कर दिया , तुम्हारी जिम्मेदारी पति की है , पति कहे माँ बाप ने नहीं पढाया ये मेरी जिम्मेदारी नहीं है मेरी जिम्मेदारी है की जो कम के लाओ वो मेरे घर पर खर्च करो , जब पत्नी कम के लाएगी तो वो अपने पिता को देगी या अपेन पति को पति नौकरी उसके शौक के लिए तो करवा नहीं रहा है उसे तो कमाऊ पत्नी चाहिए जो पैसे कमा के लाये किन्तु खर्च करते हुए महिला अधिकार संपत्ति का अधिकार की बात आ जाती है । बेतुकी बात है , कोई लाखो रुपये नहीं लग रहे है , जो भी कोर्स करेगी उससे उसे नौकरी मिलेगी और उसकी कमाई उसी घर में आएगी । और पराया धन आदि यहाँ कोई मुद्दा नहीं है , यहाँ मुद्दा कोई और है ।

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  19. ये लडका तो एक नम्बर का मक्कार लग रहा है।(लेकिन जिस तरह से यहाँ लोगों ने इसे सामान्यीकरण करके ये कहा है कि 'लडके तो होते ही ऐसे हैं' यह भी बिल्कुल गलत है)।खैर अभी इसी लडके की बात करें तो इसे यदि बच्चे को जन्म नहीं देना है तो यह भी एक मक्कारी ही है।पहले बताना चाहिए था नहीं बता पाया तो इसमें लडकी का क्या कुसूर? यदि ये दूसरी लडकी जो इसके मुताबिक ही होती से शादी करता और वह अचानक ऐसा फैसला ले लेती तो क्या होता?

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  20. देवेन्द्र जी की सभी बातें मुझे यहाँ सबसे सही लग रही है।पर एक बात इस लडके की बहुत घटिया लगी कि जब यह अपनी समस्या बता रहा है (वैसे ये समस्या ही मुझे तो पूरी तरह काल्पनिक लग रही है)तो दहेज वाली बात बीच में क्यों ला रहा है।लडकी यदि सही नहीं तो इस समस्या का दहेज से क्या लेना देना ?और क्या सुबुत कि सारा दहेज इसके पिता के पास ही है?और यदि दहेज इसे मिला होता तो क्या इसे लडकी में यह सब खामियाँ नहीं नजर आती?

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  21. देवेन्द्र जी की सभी बातें मुझे यहाँ सबसे सही लग रही है।पर एक बात इस लडके की बहुत घटिया लगी कि जब यह अपनी समस्या बता रहा है (वैसे ये समस्या ही मुझे तो पूरी तरह काल्पनिक लग रही है)तो दहेज वाली बात बीच में क्यों ला रहा है।लडकी यदि सही नहीं तो इस समस्या का दहेज से क्या लेना देना ?और क्या सुबुत कि सारा दहेज इसके पिता के पास ही है?और यदि दहेज इसे मिला होता तो क्या इसे लडकी में यह सब खामियाँ नहीं नजर आती?

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    1. राजन
      दहेज़ दे कर बहुत बात लड़की की कमियों को ही छुपाया जाता हैं ये एक आम बात हैं और जो दहेज़ लेते हैं वो ले तो लेते हैं पर बहुत बार खामियाजा भी उठाते हैं , क्युकी पैसे से गुण दोष का कोई लेना देना नहीं हो सकता हैं
      बहुत संभव हैं अगर वो पैसा इस लडके को मिला होता तो शायद इसको भी शिकायत ना होती की उसको तो कुछ भी नहीं मिला

      क्या आप को लगता हैं की अगर किसी को कहा जाये की उसकी भावी पत्नी पी सी एस बन सकती हैं और जब पत्नी घर आये तो पता लगे की नहीं ये तो संभव ही नहीं हैं ?? तब उस व्यक्ति की प्रतिक्रया क्या होगी ??

      इतना झूठ बोलना क्या उचित होता है ??? वो भी इस लिये की बेटी की शादी हो जाए
      अब क्युकी लड़का मंगली हैं तो लड़की में मंगली ही होगी
      अगर लडके के घरवालो को उपयुक्त लड़की नहीं मिली तो लड़की वालो की भी यही बात हो सकती हैं

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    2. रचना जी,
      @दहेज़ दे कर बहुत बात लड़की की कमियों को ही छुपाया जाता हैं ये एक आम बात हैं

      ऐसा बिलकुल नहीं है, दहेज़ देना एक रिवाज सा बन गया है। लड़की पढ़ी-लिखी हो नौकरी करती हो फिर भी लड़की वालों को दहेज़ (खासकर यू .पी और बिहार में ) देना ही पड़ता है क्यूंकि लड़के वाले उसके बिना शादी के लिए तैयार ही नहीं होते। कैश लेने में भले ही थोड़ी कमी कर दें, पर शादी और रिसेप्शन (जो वे देंगे ) का खर्च, लड़की के जेवर कपड़ों का खर्च , घर का सामान (सोफे, पलंग,टी वी ,फ्रिज, कार भी ) सब कुछ लेने की अपेक्षा रखते हैं। यह दहेज ही हुआ न ? आप कहेंगी ,लोग देते क्यूँ हैं? नहीं देने को तैयार होते तो फिर अपनी बेटी के लायक लड़का भी नहीं मिलता। मेरी एक फ्रेंड की बेटी है, सुन्दर है, स्मार्ट है ,MBA की हुई है, नौकरी में है 6.5 लाख का पैकेज है। उसके माता-पिता परेशान हैं , क्यूंकि उस से कम सैलरी पाने वाले लड़कों के माता-पिता की भी लम्बी चौड़ी डिमांड है। दो साल से उसके लिए लड़का ढूंढ रहे हैं। आखिरकार वे भी समझौता कर ही लेंगे।

      @अगर किसी को कहा जाये की उसकी भावी पत्नी पी सी एस बन सकती हैं और जब पत्नी घर आये तो पता लगे की नहीं ये तो संभव ही नहीं हैं ?? तब उस व्यक्ति की प्रतिक्रया क्या होगी ??

      PCS कम्पीट करना इतना आसान नहीं है। ऐसी उम्मीद लगाना ही गलत है। जितने लड़के/लड़की उसके इम्तहान में appear होते हैं। सब अपने को कम्पीट करने के लायक ही समझते हैं . पर क्या सब कम्पीट कर लेते हैं?
      माता -पिता को लगा होगा, लड़की उस योग्य है। पर लड़के का यह विश्वास कर लेना कि लड़की कम्पीट कर ही जायेगी , गलत है।
      मैं मानती हूँ, लड़की के पैरेंट्स कई बार लड़की के गुण को बढ़ा -चढ़ा कर बताते हैं। और यह गलत है पर उनकी बातों पर अंधविश्वास कर लेना यह लड़के की मूर्खता है।
      और लड़की के पैरेंट्स भी बहुत बड़ा झूठ नहीं बोलते। बड़ा झूठ जैसे लड़की अगर 10th पास है उसे बी. ए. पास बताना ,ऐसा वे भी नहीं कर पाते क्यूंकि तब तो शादी टूट ही जाती है।

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    3. रश्मि जी की बातो से सहमत हूँ की विभिन्न प्रतियोगिताओ में तो लाखो बच्चे बैठते है केवल प्रतियोगिता में बैठना ही किसी योग्यता का मापदंड नहीं होता है , फिर ये परिक्षाए तो लोग हिंदी में भी देते है अंग्रेजी ज्ञान का इससे कोई मतलब ही नहीं है और न ही खाना बनाने और बोलचाल के ढंग से , कितने ही ऐसे लोग आप को मिल जायेंगे जो गजब के पढ़ाकू होते है किन्तु उन्हें किताबी ज्ञान से ज्यादा कुछ नहीं आता है , या जो सामजिक नहीं होते है , या बोलचाल का ढंग अच्चा नहीं होता है , इसमे झूठ वाली कोई बात नहीं है, हा ये है की खुद लडके को इस बारे में जानकारी नहीं थी ठीक से और वो चीजो को बाढा चढ़ा कर समझने लगे । मामला विवाह का था जीवन भर साथ रहने का था आप को लड़की से अच्छे से बात करना था , खुद ऊन्होने कहा की की वो विवाह के पहले लड़की से मिले थे वही पर अंग्रेजी में बात कर लेते सब पता चल जाना था ।

      हा ये सही है की विवाह में दोनों तरफ से खूब झूठ बोले जाते है किन्तु रिश्ता आप को बनान है ये आप की जिम्मेदारी है की आप चीजो को अच्छे से पता करे । और ये कहना गलत है की पैसे से दुल्हे ख़रीदे जाते है, खरीदी वही चीज जाती है जो बिकाऊ हो , जो चीज बिकाऊ न हो उसे कोई कैसे खरीद सकता है, सही जूमला तो ये है की पैसे ले कर दुल्हे बेचे जाते है न की ख़रीदे ।

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    4. एक पूरी पीढ़ी को कुर्बानी देनी होगी। आत्मनिर्भर लड़कियों को दहेज़ देने के खिलाफ सख्ती से ना करना पड़ेगा। चाहे उनकी शादी न हो , तब जाकर ये दहेज़ का दानव मिटेगा। पर वे भी कई बार दबाव में आ जाती हैं , माता-पिता का समाज में उठना -बैठना मुश्किल हो जाता है। लड़की अच्छी पोस्ट पर है, अच्छा कमा रही है, ये देख,देख जलन के मारे लोग ताने देते हैं कि 'शादी तो अभी तक नहीं हुई' और कई बार दहेज़ देने की बात लड़की से छुपा ली जाती है।

      यहाँ लड़कों को ही आगे आना होगा। और दहेज़ के लिए मना करना होगा, पर मुफ्त की चीज़ किसे बुरी लगती है, इसलिए ,वे शायद ही ऐसा करें....ये सिलसिला जाने कब मिटेगा

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    5. for rashmi

      आखिरकार वे भी समझौता कर ही लेंगे?
      क्यूँ विवाह के लिये ऐसा समझोता करना जरुरी हैं , क्या वो लड़की इस समझोते के लिये तयार हैं ?

      for anshumala

      और ये कहना गलत है की पैसे से दुल्हे ख़रीदे जाते है,
      क्यूँ विवाह के लिये ऐसा समझोता करना जरुरी हैं , क्या वो लड़की इस समझोते के लिये तयार हैं ?

      मैने खरीदना और बेचना दोनों कहा हैं ? लेकिन जिसको खरीदा या बेचा जाता हैं क्या उस को इस वास्तविकता से परिचित करवा दिया जाता हैं की तुमको इतने में ख़रीदा और बेचा गया हैं ? इस लिये तुम को अपनी बात कहने का भी अधिकार नहीं हैं .

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    6. रचना जी,
      जब आपने कहा कि 'दहेज़ लड़कियों की कमी छुपाने के लिए दिया जाता है '
      आपके इस कथन के जबाब में मैंने वो उदाहरण दिए।
      ऐसा समझौता बिलकुल जरूरी नहीं है, करना भी नहीं चाहिए .और शायद मेरी फ्रेंड और उसकी बेटी ऐसा समझौता करे भी न, आखिर अब तक तो नहीं ही किया है ।

      पर एक सच यह भी है, ये भी आस-पास की ही घटना है। एक लड़के की शादी तय हुई है। लड़की अच्छी जॉब में है , सुन्दर है ,स्मार्ट है फिर भी उसकी शादी में 5 लाख दहेज़ दिया जा रहा है। शादी के और खर्चों के अलावा। उसके माता-पिता ने भी जरूर कोशिश की होगी कि ऐसा लड़का मिले जो दहेज़ न ले (आखिर फ़ालतू के पैसे किसी के पास नहीं होते ,अगर ब्लैक की कमाई न हो ) पर समझौता कर के दहेज़ देने को तैयार हुए ही न .

      ऐसा नहीं होना चाहिए पर ऐसा हो रहा है और बहुत गलत हो रहा है।
      इसीलिए मैंने अपनी टिपण्णी में ये भी कहा है, "आत्मनिर्भर लड़कियों को दहेज़ देने के खिलाफ सख्ती से ना करना पड़ेगा। चाहे उनकी शादी न हो , तब जाकर ये दहेज़ का दानव मिटेगा। "

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    7. @दहेज़ दे कर बहुत बात लड़की की कमियों को ही छुपाया जाता हैं ये एक आम बात हैं

      दहेज़ देने के बावजूद भी कौन सा ऐसा लड़का मिल गया लड़कीवालों को। जिसके सुर्खाब के पर लगे हुए हैं :):)
      धोखा तो सरासर लड़की के साथ हुआ है ...

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    8. सारे भाई बहने (जी) को बोलें
      "अतीत को लेकर समय नष्ट मत करो और न भविष्य के सपने देखो, अपना मस्तिष्क सिर्फ वर्तमान में लगाओ"

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  22. सबसे विनम्र आग्रह हैं की समस्या को समस्या की तरह ले कोई आप से अपनी बात कह रहा हैं तो इसका अर्थ ये बिलकुल नहीं हैं की आप उसको अपशब्द कहे . मक्कार इत्यादि शब्दों को प्रयोग मुझे उचित नहीं लगते .
    दूसरी बात समस्या जिसकी हैं हमे पक्ष उसका ही पता लगेगा तो निदान उसको ही देना होगा
    यहाँ कोई मुकदमा नहीं हैं की हम दुसरे पक्ष के विषय में पूछे , या जो समस्या बता रहा हैं उसको "झूठा " कह कर उसकी बात को नकार दे
    यही तो समाज में होता हैं फिर ब्लॉग पर फरक क्या हैं

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  23. रचना जी नमस्कार
    ये उसकी समस्या नहीं वो आप से उस लड़की से छुटकारा पाने वाला उपाय चाहता है
    रचना जी इस संदर्भ मैं मुझे कुछ बातें याद आती हैं जो मेरे आसपास हवी घटना पर हैं मेरा ननिहाल मेरे गावं से 5 किलोमीटर की दुरी पर है लड़के लडकिया 12 वि के बाद मेरे पास के शहर मैं जाते हैं और मेरे ननिहाल के सब बच्चे भी उस शहर मैं पढने जाते हैं
    मेरे गावं के खेत और मेरे ननिहाल के खेत की सीमाए एक दुसरे से जुडी हवी है मेरे एक जाति भाई का खेत और मेरे ननिहाल में एक सजन जो की ननिहाल का है तो मैं मामा कह सकता हूँ उनका खेत एक दुसरे के खेत के पास मैं ही है वो दोनों एक दुसरे को अच्छी तरह जानते और समझते हैं क्यूँ की वो खेत पडोसी ही नहीं आपस में धर्म भाई भी थे इस रिश्ते को वो दोनों रिश्ते दारी मैं बदलना चाहते थे एक दुसरे को तो जानते थे ही अपने बच्चो को भी जानते थे मेरे गावं के सजन का लड़का जो BA कर रहा था और मेरे ननिहाल के सजन की लड़की जो मेरे खुद की बहन के साथ 12 वि कलास मैं पढाई करती थी दोनों के माता पिता ने अपनी दोस्ती को रिश्ते दारी का जामा पहनने के लिए दोनों की सगाई कर दी और विवाह की तारीख पकी करदी जो 31.01.2013 दी एक दिन मेरे बहिन की दोस्त का मेरे पास फोन आया और मुझे इस सगाई की बात बताई और मुझे से पुछा भैया मैं उस लड़के से मिलना चाहती हूँ क्यूँ की मैंने सुना है पिताजी से की वो शादी के बाद आगे नहीं पढ़ायेंगे तो मैने कहा की तुम पापा से बात करो लो या माँ को बोलो की मैं आगे पढ़ना चाहती हूँ तो उस ने कहा मैंने बहुत समझा दिया है पापा जी बोलते हैं की जितना पढना था पढ़ लिया अब ससुराल जाकर घर का ही तो कम करना हैं कोसी तुम पढ़ लिख कर इन्द्रा गाँधी बनोगी कम आयेगी तो इतनी पढाई बहुत है लड़का पढाई कर रहा है तुम को दो समय का खाना चाहिए वो अच्छी तरह से मिल जायेगा और इतना अच्छा लड़का मिलता कहा है और वो रोने लगी मैंने कहा ठीक है तुम रोना बंद करो मैं गावं में अपने मित्रो को बोल कर उसका मोबाइल नो ले कर तुम को दे देता हूँ तुम मिल लेना पर वो तुम को स्कूल मैं ही मिलने आयेगा तुम कही मत जाना ये कह कर मैंने फोन रखा और और गावं से उस लड़के का फोन नम्बर लेकर बात करके उसे बता दिया की तुम सोमवार को जाकर स्कूल मैं मिल लो उन दोनों के बिच की बात तो मुझे नहीं पता जब मैं 25.01.2013 को घर गया और घर से ननिहाल मिलने के लिए गया तो मैं उनके गहर गया तो पता चला की कहानी बदल चुकी थी लड़का लड़की को जब भी फोन करता तो कहता मुझे सोने की चैन दे देना एक मोटर साइकल लड़की ने अपने माँ को बता दिया माँ ने लड़की के पिताजी को बताया तो वो मेरे गावं आये अपने धर्म भाई के घर और कहा देखो मित्र अपना लड़का असा असा कह रहा है तुम को तो पता है मैं कोई सरकारी नोकरी तो करता नहीं हूँ जो मोटर बाइक दू और लड़के की बहिन को पाजेम - सोने का हार करवा के दू मैं तो अपनी लड़की के सोने का हर नहीं कर व सकता तो ये सब केसे करू तुम समझा उस को लड़के का बाप भड़क गया और कहने लगा तो तुम ने लड़की को जन्म ही क्यूँ दिया जन्म देते ही मार देता अब ये सब तो करना ही पड़ेगा तेरे पास इतना करने को नहीं तो तू अपना खेत है न उस मैं से 5 बीगा मेरे लड़के के नाम कर वा दे इतना सुनकर लड़की का बाप माथा पिटता हुवा घर आया उस को कुछ समझ मैं भी नहीं आ रहा था की वो क्या करे बदनामी से भी डर लग रहा था क्यूँ की सब के सब निमत्रण पत्र सब रिश्ते दरो के वहा जा चुके थे शादी के दो दिन पहले लड़के का पिता लड़की के घर गया और कहा की तुम ने कोई जवाब नहीं दिया तुम मोटर बाइक लड़के को सोने का चैन एक अगुठी और लड़के की बहन को पाजेब और सोने का हार नहीं दे सकते तो मैं लोग शादी नहीं करेंगे इतना कह के चला गया
    तब लड़की के मामा को इस बात का पता चला तो उसने अपने किसी रिश्ते दार को कहा की असि बात है बदनामी होने वाली है तो उस रिश्ते दर ने कहा की मुझे कुछ नहीं चाहिए आप अपनी लड़की दे दो और उसी दिन 31.01.2013 को शादी कर दी
    आज भी समाज कहने को बहुत पढ़ लिख चूका है आगे बढ़ रहा है परन्तु वो वही उस पुरानी खोखली बातों और रीतिरिवाजो को ही अपना सब कुछ मानता है
    दिनेश पारीक

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    1. दिनेश जी तो बेसिक समस्या वही हुई की दहेज़ दो हम लड़का बेच रहे हैं अगर नहीं खरीद सकते तो हम दूसरी दूकान पर जाते हैं . अब लड़की के अभिभावक अगर खरीद लेते तो लड़की पसंद हो ना हो उसके साथ निभाना "कर्त्तव्य" हो जाता हैं क्युकी शादी का अर्थ यही हो गया हैं

      नयी पीढ़ी जो इस बात को ना माने वो बगावत कर रही हैं

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    2. रचना जी आपकी बात से बिलकुल सहमत हूँ मैं
      पर ये दशा इतनी बिगड़ चुकी है की ये समस्या इस ABC की नहीं Z,K,Y की भी हैं लड़का ख़रीदा बेचा जाता है तो फिर उस लड़की को सम्भालने का जिम्मा भी तो लड़के का ही होता है वो क्यूँ भूल जाता है की इसे खिलाने पिलाने के लिए जो इस के बाप से धन लिया था
      इस बात से में मैं कतई सहमत नहीं हूँ की जब हम ने लड़के को बेच कर लड़की ले कर आये हैं तो उस लड़की की जिमेदारी ओ से क्यूँ भागते है कम से कम उसे तो पूरा करे अगेर हमारे खुद अपनी संतान किसी कारन वश अपग हो या वो सामान्य जीविन व्यतीत न कर सके तो क्या हम उसे मार देते है घर से निकाल देते हैं

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  24. श्रीमान अ ब स

    आप की समस्या का असल में कोई समाधान नहीं है क्योकि सबसे बड़ी समस्या आप खुद है , अभी तक आप को दी जा रही टिप्पणिया पूरी भी नहीं हुई आप ने एक और फैसला ले लिया , और आप के इस फैसले को देख कर साफ पता चलता है की आप के विवाह के समय आप के माता पिता ने आप से कोई राय क्यों नहीं ली क्योकि आप ठीक और सही फैसले लेने में सक्षम नहीं है , आप बिना सोचे समझे बिना आगे का जाने तुरंत ही फैसले ले लेते है जो आप को आगे चल कर नुकशान पहुंचाएंगे , शायद इसलिए आप के माता पिता ने आप की विवाह एक सीधी साधी लड़की से किया जो आप की ये सारी बेफकुफिया चुपचाप सह ले आप को जवाब न दे और विवाह को निभाती रहे , क्योकि कोई भी शहर में पढ़ी लिखी समझदार लड़की ऐसे पति को नहीं झेलेगी जो उसे अपने से कमतर समझे , या उसे निचा दिखाए ( सम्भव है की आप जब अपने घर जाते होंगे तो रिश्तेदारों को भी बात बात पर निचा दिखाते होंगे की मै तो दिल्ली वाला हूँ पढ़ा लिखा हूँ बड़ा आधुनिक हूँ , क्या है की मै ऐसे लोगो को झेलती रहती हूँ जिन्हें मुंबई आये जुमा जुमा चार दिन होता है और ऐसे व्यवहार करते है जैसे की लन्दन में पले बढे है । ) वो चार दिनों में या तो आप को ठीक कर देती या आप को छोड़ कर चली जाती , साथ में दहेज़ या घरेलु हिंसा का केस करती , आप से अपने लिए हर्जाना भत्ता मांगती और आप की सारी स्मार्टनेस बाहर निकाल देती।

    चलिए अब आप समस्याका समाधान छाहते है वो भी बता देती हूँ । सबसे पहले तो अपनी पत्नी को गावर कम पढ़ी लिखी पागल कहना बंद कीजिये ( जो आप उसे दिन में चार बार कहते होंगे ) , आप उससे बहुत नफरत करते है , उसे थोडा कम कीजिये और उसे अब सामान्य मानना शुरू कीजिये ( प्यार करने के लिए नहीं कह रही हूँ वो आप कर नहीं सकते है ) जैसा की मैंने पहले कहा है की उसे अंग्रेजी सिखाने के लिए और प्रस्नालती डेवलप करने के कोर्स में डालिए , रातो रत किसी बदलाव की उम्मीद न करे , जैसा की आप ने कहा की उसे वाशिंग मशीन और माइक्रो वेव चलाना सिखने में भी देरी हुई किन्तु सिख तो गई न इसका मतलब है की वो सिख सकती है भले देर से ही सही तो इंतजार करे उसके अन्दर आ रहे बदलावों को देखने के लिए , घर में उसके साथ सम्मान से बात करे जिससे उसका आत्मविश्वास बढे जो आप ने उसके साथ ख़राब व्यवहार करके बिलकुल ख़त्म कर दिया है , उसे डराए नहीं उसे समझाए , खुद आप भी योग करे आप काफी गुस्से वाले तुनकमिजाज , और दूसरो को कमतर समझने वाले है अपनी भी काउंसलिंग कराये ( उम्मीद है की इतने आधुनिक होंगे की इसे आप अपने को पागल कहा जाना नहीं समझेंगे, भारत में आधे से ज्यादा पति पत्नी काउंसलिंग के लायक होते है ) आप चाहते है की वो टीचिंग न करे तो उससे इस बारे में बात कीजिये की उसका और किन चीजो में शौक है , ड्रेस और घरो को सजाने से लेकर न जाने कितने ही कोर्स है बाजार में जो उसे पसंद हो जो वो करना चाहे उसे वो कराये जिसके लिए समय लगेगा , और इतना धैर्य तो आप को रखना ही होगा । बच्चे को जन्म नहीं देना चाहते है फ़िलहाल के लिए सही फैसला है दो चार साल इसके बारे में सोचिये भी मत किन्तु ध्यान रखियेगा की आप की पत्नी तब तक गर्भवती भी न हो ( जी हा हमारे यहाँ बच्चे अभी नहीं चाहिए कहने वाले लाखो होते है किन्तु उसमे से कुछ ही इस का पालन कर पाते है ज्यादातर का प्रिकॉशन फेलियर हो जाता है सो ध्यान रखे ) वरना उसके बाद गर्भपात का निर्णय सही नहीं होगा । जितना अपनी पत्नी में बदलाव लाना चाहत है उससे ज्यादा आप को बदलने की जरुरत है , पत्नी शब्द और अपनी पत्नी के बारे में अपनी सोच को , उसे जरुर बदले । आगे के लिए शुभकामनये !

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  25. रचना जी,दूसरे पक्ष की सुनेंगें तब तो खैर सब पूरी तरह सामने आ जाता कि यह खुद कैसा है जो पत्नी की इतनी कमियाँ गिना रहा है।मैंने समाधान वगेरह की बात इसलिए नहीं कि क्योंकि जैसा कि देवेन्द्र जी ने कहा कि ये पहले ही 'नहीं कभी नहीं' जैसा नकारात्मक रवैया दिखा रहा है ।समाधान में उसकी रुचि नहीं बल्कि खुद को ठगा दिखाकर एक झूठा माहौल रचना चाहता है और अपने जानने वालों के बीच उसने ऐसा किया भी होगा।ये सही है कि कई ऐसे पुरुष भी होते है जो अपनी पत्नी के खराब व्यवहार से परेशान रहते हैं और तलाक भी नहीं ले सकते हैं पर फिर भी वो तो अपने जानकारों के सामने उसके खराब व्यवहार को छुपाते हैं सामंजस्य बिठाते हैं अपने वैवाहिक जीवन का तमाशा नहीं बनाते।लेकिन इसकी पत्नी में तो ऐसी कोई कमी नहीं हैं फिर भी ये उसे नीचा दिखा रहा है(इसका उद्देश्य ही यही है)।बल्कि ये जैसा चाहता है वैसा कर रही है पर इसमें धैर्य ही नहीं है बल्कि अब तो इमोशनल ब्लैकमेलिंग पर ही उतर आया है।वाह रे ड्रामेबाज !
    प्रवीण जी की बात सही भी लगती है कि ऐसे आदमी का भरोसा नहीं पत्नी को नुकसान भी पहुँचा सकता है पर क्या करें ये खुद ही अपनी सोच सुधारे तो ये कोई समस्या है ही नहीं।

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  26. दुन्नो हाथे में लढ्ढू 'हीरो' कब्बो ना मिली
    लड़की चहबे फैंटास्टिक त नखरा झेले के परी।

    दुन्नो हाथे में लढ़्ढू 'राजा' कब्बो ना मिली
    लड़की बोली इंगलिश-विंगलिश करवाचौथ ना करी।

    दुन्नो हाथे में लढ्ढू 'प्यारे' कब्बे ना मिली
    जब कमाई चौचक त चूल्हा फूंके के परी।

    ए बदे कहत हई...

    करले बेटा समझौता जल्दी जिंदगानी से
    एगो बिटिया पैदा कर आपन प्रान पियारी से।

    बिटिया जब मुस्काई त अकल तोहें आ जाई
    मेहरारू प्रान पियारी लागी जिनगी सुधर जाई।

    .....हमारी ढेर सारी शुभकामनाएँ है आप का जीवन सुखमय हो। दिल मत तोड़ना..मस्त रहना। यार- दोस्त सब बेकार की बातें हैं। साधन हैं, साध्य नहीं। जीवन साथी तो वह है जिसके साथ तुम्हारे माता-पिता ने सात फेरे लगवाये। कुछ परवाह करो तो बस उसी की करो..बाकी चार दिन की जिंदगानी है..कोई यहाँ अमृत पी कर नहीं आया। अपना रोल ठीक से निभाओ..मस्त रहो।



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  27. Dear Mr. ABC ,

    मुझे आपसे हमदर्दी है . लेकिन आप पहले ऐसे व्यक्ति नहीं हो जिसे मन चाहा जीवन साथी नहीं मिला . To expect is human nature , but you are expecting a lot from your wife.
    सबसे पहले तो आप ये कहना बंद कर दें की आपके साथ गलत हुआ है . जैसे कोई ग्राहक कहता है ' पैसा भी गया और मन पसंद सामान भी नहीं मिला ' . पत्नी को मानव की तरह देखना शुरू कीजिये . उसमे भी तो अपने जीवन साथी के बारे में कोई छवि होगी ? क्या आपने कभी उससे पुछा ?
    आपने कहा की उसे खाना बनाना नहीं आता , किस तरह का खाना आप उसे बनाने की ख्वाहिश रखते हो ? यह बहुत ही बेतुका सा प्रतीत हो रहा है की 1 भारतीय लड़की को भारतीय खाना बनाना नहीं आता . आप अपने मन पसंद खाने की रेसिपी खोज के उसे दे सकते हैं ...उसकी मदद कर सकते हैं . 3-4 बार में वो तो क्या आप भी सीख जाओगे .
    आपने लिखा मै चाहता हूँ वो किसी प्रोफेशनल की तरह कहीं नौकरी करे , किसी स्कूल में नहीं .. आज कल टीचर्स भी बहुत प्रोफेशनल होते हैं . जैसा आपने लिखा की उसकी सीखने की गति धीमी है तो शुरुआत में उसे जहाँ भी वो खुद को comfortable महसूस करे आप उसे ज्वाइन करने दें ..later on she will pick up speed of metro city Delhi & can switch to professional job .
    आपने लिखा लेकिन वो दान देहेज तो सब मेरे अभिभावक के पास हैं >> अगर आपके मन में धन न मिल पाने की और ठगे जाने की भावना है तो कृपया इसे निकाल फेंके ..
    आपने पुछा मेरे पास क्या options हैं ?... you have option to support and cooperate with your wife . आप अपने दोस्तों की जिंदगी से अपनी तुलना करना बंद करें .
    28 साल कोई बहुत बड़ी उम्र नहीं होती ..... कम से कम अगले 2 साल तक धैर्य रखिये और उसे सीखने दीजिये ..... इस वक़्त परिवार न बढाने का फैसला आपने ठीक लिया है ..... पर ये आप दोनों का होना चाहिए ..सिर्फ आपका नहीं .....


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  28. Dear Mr. ABC ,

    1 बात मैं लिखना भूल गयी .... अगर आप खुद को आधुनिक विचारों का समझते हैं तो ये मंगली वाली बात अपने दिमाग से निकाल फेकिये . आधुनिकता रोज़ ड्रिंक करने से नहीं बल्कि विचारों से आती है . ...... या आप भी उन में से 1 हैं जो पेपर तो साइंस का देने जाते हैं पर ताबीज बाँध कर !

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  29. लडके का मंगली होना
    क्या उसका दोष था ??
    लडके का विद्रोह ना करना
    क्या इसको दोष माना जा सकता हैं ?
    दहेज़ लेने / देने की शुरुवात इस लडके ने तो नहीं की
    फिर उस रीति को बंद ये कैसे कर सकता हैं { क्या इतना विद्रोह संभव हैं, करना चाहिये , पर कितने करते हैं और उनको कितना सम्मान हमारा समाज देता हैं ?}


    एक लड़की जो शायद दुसरे अटेम्प्ट में पी सी एस बन जाती उसका विवाह करवा कर उसकी जिन्दगी से कौन खेल रहा हैं ? उसका दोषी कौन हैं ??

    अगर पी सी एस में बैठने की प्रक्रिया केवल दिखावा थी तो गृह कार्य में प्रवीणता क्यूँ नहीं , समय रहते सीख जाएगी ?? ये क्या सही हैं ये तो मुक्ति की कहीं बात ही हुई की "शादी कर दो फिर सब ठीक हो जाएगा "

    आज कल गाँव देहात से शहर तक सब लडकिया बराबरी की दावा करती हैं ? किस बात की बराबरी ?
    पढाई की
    कमाने की
    घर चलाने की

    आ बा सा की समस्या आज बड़ी कोमन समस्या हैं क्युकी यहाँ उसने खुद कह दिया इसलिये उसमे दोष खोज कर उसको गलत बताना आसान हैं लेकिन

    फिर उन सब समस्या का क्या
    जहां सास सौर को बहु से अपेक्षा होती हैं की वो आते ही सब संभाल ले , जहां पूरा परिवार साथ होता हैं वहाँ भी लडके के परिवार वालो को यही लगता हैं लड़की को ये ये नहीं आता

    लेकिन उस लड़की को चुन कर वो ही लाते हैं तो उनको अपनी चुनाव प्रक्रिया के दोष क्यूँ नहीं दिखते ??

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  30. आजकल बच्चो को ये कहा जाये की फला कम सही नहीं है तो उल्टा समझाने लगते हैं की मुझे समझाने की जरुरत नहीं है अगेर आप उसे ये गलती से भी कह दे की हम ने तुम को इतना बड़ा ये दिन देखने के लिए तो नहीं किया तो वो बच्चे उस बात को सुनकर बस अपने दिमाग पर जयादा जोर ने देकर एक शब्द का इस्तेमाल करेंगे की आपके तो प्राण पखेरू उड़ जायेंगे वो शब्द है आपका तो फर्ज था
    तो क्या उस लड़की के प्रति या अपनी जीवन सगिनी के प्रति उसका कोई फर्ज नाही
    था

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  31. रचना जी आपने कहा ( नयी पीढ़ी जो इस बात को ना माने वो बगावत कर रही हैं )
    बगावत कर रही है तो वो शादी से पहले अपने माता पिता से क्यूँ नहीं कहती है [पहले चुप क्यूँ रहती है हनीमून मनाने के बाद और अपना जी भर जाने के बाद बगावत क्यूँ करती है पहले भी तो कह सकती है कुछ करने वाले को कोई रोक सकता है कोई नहीं अगेर पहले बगावत कर टी ये नई पीढ़ी तो शायद 23 जिन्दगिया तो बर्बाद होने से बच सकती है
    बगावत तो करती है लेकिन बहुत देरी से तभी तो इस रूडी वादी समाज को बढ़ावा मिल रहा है

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  32. mere comments yaha dikahi kyun nahi de rahe hain

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    1. @लडके का विद्रोह ना करना
      क्या इसको दोष माना जा सकता हैं ?

      बिलकुल लड़के का ही दोष माना जाएगा , लड़कों के साथ ऐसा नहीं है कि अगर वे दहेज़ लेने से मना कर दें, दहेज़ के खिलाफ विद्रोह कर दें तो उनकी शादी नहीं होगी या उन्हें अच्छी जीवनसंगिनी नहीं मिलेगी।

      @दहेज़ लेने / देने की शुरुवात इस लडके ने तो नहीं की
      फिर उस रीति को बंद ये कैसे कर सकता हैं "

      ये तो बिलकुल हास्यास्पद सी बात है ,यानि कि समाज में जितनी भी बुराइयां हैं उन्हें ख़त्म नहीं करना चाहिए ??? क्यूंकि उनकी शुरुआत तो आज नहीं हुई??
      जिसने बुराई की शुरुआत की, उसे ही ख़त्म करना चाहिए ?? तब तो सती -प्रथा, बाल-विवाह ,छुआ छूत जैसी अनेक बुराइयां ख़त्म होनी ही नहीं चाहिए??

      @क्या इतना विद्रोह संभव हैं, करना चाहिये , पर कितने करते हैं और उनको कितना सम्मान हमारा समाज देता हैं .

      ये विद्रोह जैसी कोई बात है ही नहीं। दहेज के लिए न करना कोई बहुत बड़ा पराक्रम नहीं है। कोई भी मना कर सकता है। कई लड़कों को और उनके पिताओं को जानती हूँ। जिन्होंने दहेज़ से साफ़ मना कर दिया। और उनका बहुत सम्मान है। जब भी कोई समारोह होता है, उन सबकी चर्चा जरूर होती है कि , कितने लड़की वाले उनसे आग्रह कर रहे थे पर उनलोगों ने दहेज़ के लिए मना कर दिया। उनका जिक्र सब बहुत सम्मान के साथ करते हैं।

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  33. मुझे तो लगता है कि यहाँ लड़की को लड़के द्वारा अंडर एस्टीमेट किया जा रहा है, ऐसी कोई चीज नहीं जो कोई सीख ना सके फ़िर भले ही वो कितना ही मूर्ख क्यों ना हो, और जिसने कॉलेज पास किया हो उसके लिये तो हम बिल्कुल नहीं मानते, हमें तो कमी लगती है कि लड़के ने कभी उस लड़की को जिम्मेदारी नहीं दी, जिम्मेदारी जब कंधे पर आती है तो जाने कैसे कैसे लोग पता नहीं क्या क्या सीख जाते हैं ।

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  34. http://indianwomanhasarrived.blogspot.in/2013/02/blog-post_17.html


    mukti kaa ek kament haen jo yahaan post nahin ho rahaa thaa is liyae aap log usko nayii post kae rup me daekh saktae haen

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  35. मेरा एक बेहद अज़ीज मित्र है. नौकरी में आने के कुछ दिनों बाद ही उसके पिता कि मृत्यु हो गई. उसके बाद अपने दोनों छोटे भाई को उसने संभाला, उनका व्यापार ठीक करने के लिए उसने अभी हाल तक एक रुपये कि भी सेविंग नहीं की. उसके बड़े भाई ने तब सिर्फ तमाशा देखा. कल मुझे वह बोल रहा था, "यार, जब तक मैंने अपनी पसंद कि लड़की की बात घर में नहीं की थी तब तक मैं पूरे खानदान का सबसे अच्छा था. मगर अब मुझ सा नालायक कोई नहीं है."

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  36. हम सब इसे आज की समस्या समझ रहे हैं। पर इस तरह की सोच समाज में हमेशा से मौजूद रही है .करीब तीस-चालीस साल पहले श्रीलाल शुक्ल ने अपने उपन्यास 'अज्ञातवास ' में बिलकुल ऐसी ही समस्या का जिक्र किया है।

    सतीश पंचम जी ने अपनी एक पोस्ट में उस उपन्यास का उल्लेख किया है।

    "उस उपन्यास में जिक्र है , उपन्यास का मुख्य पात्र एक विधुर रजनीकान्त है, जिसने कि अपनी पत्नी को इसलिये छोड़ रखा था कि वह गाँव की थी,रहने-बोलने का सलीका नहीं जानती थी। एक दिन जबरी अपने पति रजनीकान्त के घर आ डटी कि मुझे रहना है आपके साथ लेकिन रजनीकान्त ने डांट दिया। उसे साथ नहीं रखने की ठानी लेकिन एक दो दिन करके रहने दिया। रजनीकान्त बाहर जाता तो घर के दरवाजे, खिड़कियां बंद कर जाता कि कहीं बाहर निकली तो लोग इस गंवारन को देखेंगे तो क्या सोचेंगे। दो चार दिन तक ताला बंद करके जाने के बाद कहीं से कोई शिकायत नहीं सुनाई पड़ी तो मिस्टर रजनीकान्त बिना ताला लगाये ऑफिस जाने लगे। उधर क्लब मे इन्हें चिंता लगी रहती कि लोग उनकी पत्नी के बारे में सुनेंगे, उनके शादी-शुदा होने के बारे में सोचेंगे तो क्या सोचेंगे।

    धीरे धीरे रजनीकान्त महाशय कुछ अंदर ही अंदर खिंचे खिंचे से रहने लगे। उधर लोगों को धीरे धीरे पता लगा कि इनकी श्रीमती जी आई हुई हैं। एक दिन उनका मित्र गंगाधर अपनी पत्नी को लेकर इनके यहां आ पहुंचा। मजबूरी में भीतर से पत्नी को बुलवाना पड़ा। ड्राईंग रूम में चारो जन बातें करने लगे। मित्र की पत्नी श्रीमती रजनीकान्त से गांव देहात की बातें पूछतीं, मकई,आम के बारे में चर्चा करतीं। सभी के बीच अच्छे सौहार्द्रपूर्ण माहौल में आपसी बातचीत चलती रही। श्रीमती रजनीकान्त भी सहज भाव से बातें करती रहीं लेकिन मिस्टर रजनीकान्त को लग रहा था जैसे उनके मित्र की पत्नी जान बूझकर उनकी पत्नी से गांव देहात की बातें पूछकर मजाक उड़ा रही है, खुद को श्रेष्ठ साबित कर रही है। उनकी नजर मित्र की पत्नी के कपड़ों पर पड़ी जो काफी शालीन और महंगे लग रहे थे जबकि अपनी पत्नी की साड़ी कुछ कमतर जान पड़ रही थी। जिस दौरान बातचीत चलती रही महाशय अंदर ही अंदर धंसते जा रहे थे कि उनकी पत्नी उतनी शहरी सलीकेदार नहीं है, गांव की है और ऐसी तमाम बातें जिनसे उन्हें शर्मिंदगी महसूस हो खुद ब खुद उनके दिमाग में आती जा रही थीं। "

    पूरी पोस्ट यहाँ पढ़ी जा सकती है
    अज्ञातवास.......

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