जब भी शराब या धुम्रपान की बात होती हैं तो लोगो का जेंडर बायस तुरंत दिखता हैं । सबको लगता हैं लड़कियों को इन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिये ।
ना जाने पिछले ५ सालो में कितनी ही हिंदी ब्लॉग पोस्ट पर आपत्ति जतायी हैं की नहीं ये केवल लड़कियों / महिलाओ के लिये ही नहीं लडके / पुरुषो के लिये भी उतना ही हानिकारक हैं
लोग कभी क़ोई भी गलत चीज़ को रोकने के लिये पुरुषो पर प्रतिबन्ध लगाना सही नहीं समझते और इस बात को कहते ही की दोनों के लिये गलत हैं तुरंत अपना पक्ष रख देते हैं की आप लड़कियों को गलत रास्ते पर जाने की सलाह देती हैं । आप महिला के लिये जो सही हैं उस पर कभी बात नहीं होने देती ।
महिला के लिये "सही " और पुरुष के लिये "सही " दोनों अलग अलग कैसे हो गए ?
अगर सिगरेट और शराब का सेवन सेहत के लिये हानिकारक हैं तो दोनों के लिये हैं अन्यथा किसी के लिये भी नहीं हैं ।
बहुधा देखा गया हैं की अगर क़ोई हम से क़ोई प्रश्न पूछता हैं जैसे शराब नीट ले या सोडा का साथ , सिगरेट ज्यादा बेहतर हैं या सिगार तो हम उस प्रश्न का उत्तर तो देते नहीं हैं हाँ नैतिकता का एक लम्बा लेक्चर जरुर देते हैं , सिगरेट और शराब नहीं लेते हैं ,, अभी तुम छोटे हो इत्यादि ।
अब हमारे ना बताने { मै उनकी बात नहीं कर रही जो बता ही नहीं सकते } से क्या वो व्यक्ति सिगरेट और शराब नहीं लेगा ? होसकता ना ले पर बहुत संभव हैं ले । इस लिये क्या ये बेहतर ना हो की हम अपने से छोटो को उनके प्रश्नों का उत्तर दे ना की नैतिकता का भाषण ।
कम से कम सही उत्तर मिलने से वो गलत तरीका अपनाने से बच जाएगा ।
लोगो का ये कहना की सिगरेट और शराब का सेवन स्त्रियाँ पुरुष से बराबरी करने के लिये करती हैं कुछ अंशो में सही हैं । इन दोनों चीजों का सेवन के प्रकार की आज़ादी का द्योतक हैं और आज़ादी की चाह किसे नहीं हैं ?
साइंस भी आज ये मान चुकी हैं की पेसिव स्मोकिंग से नॉन स्मोकर को उतना ही नुक्सान होता हैं जितना स्मोकर को इस लिये पब्लिक प्लेस पर स्मोकिंग बैन कर दी गयी हैं । इसमे स्त्री या पुरुष के लिये सही और गलत पर बहस करना फिजूल हैं । हां हमारे कानून में इसकी इजाजत हैं दोनों को ।
गर्भ में शिशु को धुये से नुक्सान होता हैं चाहे माँ धुम्रपान करे चाहे पिता ।
मोनाम्मा कोक्कड़ के प्रयासों का नतीजा हैं की भारत में सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने पर बैन लगा दिया
ये हमारे अन्दर छुपा हुआ जेंडर बायस हैं जो किसी भी गलत चीज़ को केवल स्त्री के लिये गलत बताता हैं ।
और हम में से जितने भी स्त्री पुरुष समानता की बात करते हैं वो स्त्रियों को गलत करने के लिये उकसाते नहीं हाँ सोच में बदलाव चाहते हैं जहां स्त्री और पुरुष दोनों के लिये समाज के कानून एक से बनाए जाये ।
मोरल पुलिसिंग का अधिकार भी केवल पुरुषो का नहीं हैं इस बात को आज की लडकियां बार बार कह रही हैं
चाहे वो पिंक चड्ढी कैम्पेन हो जहां लड़कियों को पब जाने से रोकने के विरोध का विरोध था
या सलट वाल्क हो जो लड़कियों के निर्धारित कपड़े ना पहनने का विरोध का विरोध था
मोरल पुलिसिंग दोनों की करे समाज पर कानून और संविधान के दायरे के अन्दर करे । जेंडर बायस मोरल पुलिसिंग लड़कियों में आक्रोश पैदा कर रही हैं और लड़को को इन्सेक्युर बना रही हैं ।
भारतीये संस्कृति का हवाला दे कर लड़कियों के खिलाफ भेद भाव हमेशा से समाज करता आया हैं जो सही नहीं हैं ,
भारतीये संस्कृति लड़कियों के खिलाफ मोरल पुलिसिंग से बहुत ऊपर हैं ।
All post are covered under copy right law . Any one who wants to use the content has to take permission of the author before reproducing the post in full or part in blog medium or print medium .
Indian Copyright Rules