बेटी नहीं चाहिये
कन्या भ्रूणहत्या इस बात का प्रमाण हैं ।
नकोशी कह कर कन्या को नकार देना भी इसी बात का प्रमाण हैं
पर क्यूँ लोग बेटी नहीं चाहते , कुछ तो कारण होगे ही क्या इस पोस्ट के जरिये निस्पक्ष भाव से उन कारणों की गिनती करवाई जा सकती हैं ।
समस्या हैं , निदान भी सब चाहते हैं , अपनी अपनी जगह हर क़ोई इस पर लिखता हैं तो क्या आज गिन ले हम सब वो कारण जो बेटी को इतना अप्रिय बनाते हैं की उसकी माँ उसको नकोशी ही कह देती हैं या परिवार वाले माँ कन्या भ्रूणहत्या के लिये ही विवश कर देते हैं । कन्या भ्रूणहत्या को स्वेच्छा से किया गया गर्भपात न समझा जाए और कारणों की लिस्ट बना ली जाये की क्यूँ ना पसंद हैं बेटी हमारे समाज में की लोग उसके जनम लेने को ही रोकना चाहते हैं । क्या इन सब की भी क़ोई मज़बूरी हैं शौक से तो क़ोई करेगा नहीं ।
जब लिस्ट बन जाये तो विमर्श करने में आसानी होगी ।
मेरे ख़याल से सबसे पहला कारण हैं की माँ पिता आजन्म पुत्री की सुरक्षा करने में अपने को अक्षम पाते हैं इस लिये कन्या भ्रूणहत्या ही कर देते हैं
अब देखिये इस कारण पर विमर्श आगे करेगे आज आप से आग्रह और निवेदन हैं की आप इस प्रकार का क़ोई भी कारण जो आप को सही समझ में आता हैं उसकी एक लिस्ट बना दे यहाँ
ना पसंद हैं बेटी इस समाज को आज भी क्यूँ - एक फेरिहिस्त कारणों की - आप बना दे - विमर्श होता रहेगा
लिस्ट जो पाठक दे रहे हैं कमेन्ट में
All post are covered under copy right law । Any one who wants to use the content has to take permission of the author before reproducing the post in full or part in blog medium or print medium ।
Indian Copyright Rules
कन्या भ्रूणहत्या इस बात का प्रमाण हैं ।
नकोशी कह कर कन्या को नकार देना भी इसी बात का प्रमाण हैं
पर क्यूँ लोग बेटी नहीं चाहते , कुछ तो कारण होगे ही क्या इस पोस्ट के जरिये निस्पक्ष भाव से उन कारणों की गिनती करवाई जा सकती हैं ।
समस्या हैं , निदान भी सब चाहते हैं , अपनी अपनी जगह हर क़ोई इस पर लिखता हैं तो क्या आज गिन ले हम सब वो कारण जो बेटी को इतना अप्रिय बनाते हैं की उसकी माँ उसको नकोशी ही कह देती हैं या परिवार वाले माँ कन्या भ्रूणहत्या के लिये ही विवश कर देते हैं । कन्या भ्रूणहत्या को स्वेच्छा से किया गया गर्भपात न समझा जाए और कारणों की लिस्ट बना ली जाये की क्यूँ ना पसंद हैं बेटी हमारे समाज में की लोग उसके जनम लेने को ही रोकना चाहते हैं । क्या इन सब की भी क़ोई मज़बूरी हैं शौक से तो क़ोई करेगा नहीं ।
जब लिस्ट बन जाये तो विमर्श करने में आसानी होगी ।
मेरे ख़याल से सबसे पहला कारण हैं की माँ पिता आजन्म पुत्री की सुरक्षा करने में अपने को अक्षम पाते हैं इस लिये कन्या भ्रूणहत्या ही कर देते हैं
अब देखिये इस कारण पर विमर्श आगे करेगे आज आप से आग्रह और निवेदन हैं की आप इस प्रकार का क़ोई भी कारण जो आप को सही समझ में आता हैं उसकी एक लिस्ट बना दे यहाँ
ना पसंद हैं बेटी इस समाज को आज भी क्यूँ - एक फेरिहिस्त कारणों की - आप बना दे - विमर्श होता रहेगा
लिस्ट जो पाठक दे रहे हैं कमेन्ट में
- शिल्पा ने कारण दिया की बेटियाँ इस लिये ना पसंद हैं क्युकी वो बुढ़ापे में साथ नहीं होती हैं यानी माँ पिता का ख्याल नहीं रख सकती।
- विजय जी ने कारण स्पष्ट नहीं दिया पर उनका कहना की शादी के खर्च का इन्तेजाम हो जाता हैं भगवन भरोसे , निष्कर्ष देता हैं की शादी का खर्चा भी कारण हो सकता हैं
- ihm ने कारण दिये हैं
- १. बेटियां घर की इज्ज़त होती हैं, उन्हें संभालना बहुत मुश्किल होता है, उनकी एक ज़रा सी चूक से परिवार के पुरुष सदस्यों की नाकें कट सकती है. जो नाकें बहुओं के जलने, और भ्रूण हत्या को झेल जाती है वो एक पुत्री के किसी सहयोगी या सहपाठी से हंस कर बोल लेने से खतरे में पड़ जाती है.
२. परेशानियाँ ज्यादा, फायदे कुछ नहीं, पढ़ायें लिखायें माँ-बाप, तन्ख्य्वा पर हक़ होता है ससुराल वालों का. पालने पोसने में मेहनत तो उतनी ही लगती है, खर्चा भी बराबर होता हो, आजकल बहुत से माता-पिता लड़कियों को ट्रेनिंग देने के बहाने उन्हें स्कूल से आते ही काम में भी नहीं लगाते. इतना सब करते समय जो पारंपरिक परिवार हैं उन्हें फिर भी डर रहता है की इतना लाड़ प्यार दे रहे हैं, कहीं इंसानियत व आदर की आदत पड़ गयी तो ससुराल में कैसे निभेगी.
3. हमारी परंपरा है की जब तक कुछ वापस मिलने की उपेक्षा ना हो, माता पिता भी प्यार नहीं करते. - राजन ने कारण दिया बेटी के माँ बाप को समाज में बहुत बेचारा समझा जाता है।उन्हें दयनीय और कमतर माना जाता है. और बेटी बुढापे में साथ नहीं रह पाती क्योंकि उसे विवाह के बाद ससुराल जाना पडता है
- G Vishwanathजी का कहना हैं समाज में पुत्र मोह हैं ख़ास कर पुरुषो में पुत्र के लिये लालसा ज्यादा हैं
- कुमार राधारमण जी के अनुसार कारण हैं की बेटियां आश्रित मानी गई हैं,अर्जक नहीं।और जोबेटी कमाती भी हैं वो भी अपने परिवार के लिये कुछ नहीं करती हैं { करनहीं सकती की बात से अलग हैं ये बात की अभी भी समाज में बेटियाँ अपने माँ पिता के लिये अपने कर्तव्यो का पालन नहीं करती हैं } ।
- डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कारण दिया हैं की नापसंद होती हैं आज भी बेटियाँ क्युकी माँ पिता के उनकी सुरक्षा के लिये चिंतित रहते हैं और घर में ही उन्हे सुरक्षित मानते हैं जिस के कारण वो आर्थिक भार की तरह होती हैं।
- वाणी जी के अनुसार दो प्रमुख कारण हैं -- लड़कियों के सम्मान या इज्ज़त के कड़े मानदंड और असुरक्षित समाज ....
- अमित चन्द्र ने दो कारण दिये हैं . पहले तो लडकियों के प्रति समाज की दोहरी निति और जो सबसे बड़ा कारण है वो है दहेज
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