२४ जनवरी से बालिका दिवस । इंग्लिश के अखबार मे ये विज्ञापन देखा । मन खीनता से भर गया । सारे दिन सब न्यूज़ चॅनल पर इस विवाद पर चर्चा हुई कि एक पाकिस्तानी का चित्र क्यूँ डाला गया । सही हैं अपने देश मे आइकॉन कम हैं कि विदेशी आईकोन का प्रदर्शन किया जाए । देश कि गरिमा का मुद्दा था इस लिये ये पोस्ट कल नहीं डाली ।लेकिन कृष्णा तीरथ से पूछना जरुर चाहती हैं कि
वो महिला एवं बाल विकास मंत्री हैं लेकिन कन्या भूण ह्त्या के खिलाफ जो विज्ञापन वो दे रही हैं उसमे कहीं भी किसी भी महिला का चित्र नहीं हैं क्या कन्या भूण हत्या केवल इस लिये रोकी जाए कि माँ बेटा पैदा कर सके । माँ का महातम क्या केवल बेटा पैदा करने से ही जुड़ा हैं ।
क्या कन्या भूण ह्त्या इस लिये नहीं बंद होनी चाहिये क्युकी बेटी को भी समान अधिकार हैं जीने का ?? क्या कृष्णा तीरथ जी को कोई ऐसी भारतीये महिला नहीं देखी जिसको पैदा करके उसकी माँ गौरवान्वित हुई हो। या क्या " बालिका दिवस " भारत मे इस लिये मनाया जाता हैं कि औरत को याद दिलाया जा सके कि तुमको बेटा पैदा करना हैं इस लिये ही हमने तुमको नहीं मारा ।
जब खुद मिनिस्टर एक महिला हो कर जेंडर बायस फेलाने मे पहला कदम उठा रही हो तो बालिकाओ का क्या भविष्य हैं इस देश मे आप खुद ही सोचे शेम ओन यू कृष्णा तीरथ
Its highly disgusting krishna teerath that when india has a woman president you want to emphasize that the girl child needs to be saved so that she can bear a male child . shame on you krishna teerath
None is intersted in saving girl child and even if they want to its only for giving birth to a male child why else the goverment could not find one single woman to feaure in the advertisement