नारी ब्लॉग को रचना ने ५ अप्रैल २००८ को बनाया था

हिन्दी ब्लोगिंग का पहला कम्युनिटी ब्लॉग जिस पर केवल महिला ब्लॉगर ब्लॉग पोस्ट करती हैं ।

यहाँ महिला की उपलब्धि भी हैं , महिला की कमजोरी भी और समाज के रुढ़िवादि संस्कारों का नारी पर असर कितना और क्यों ? हम वहीलिख रहे हैं जो हम को मिला हैं या बहुत ने भोगा हैं । कई बार प्रश्न किया जा रहा हैं कि अगर आप को अलग लाइन नहीं चाहिये तो अलग ब्लॉग क्यूँ ??इसका उत्तर हैं कि " नारी " ब्लॉग एक कम्युनिटी ब्लॉग हैं जिस की सदस्या नारी हैं जो ब्लॉग लिखती हैं । ये केवल एक सम्मिलित प्रयास हैं अपनी बात को समाज तक पहुचाने का

15th august 2011
नारी ब्लॉग हिंदी ब्लॉग जगत का पहला ब्लॉग था जहां महिला ब्लोगर ही लिखती थी
२००८-२०११ के दौरान ये ब्लॉग एक साझा मंच था महिला ब्लोगर का जो नारी सशक्तिकरण की पक्षधर थी और जो ये मानती थी की नारी अपने आप में पूर्ण हैं . इस मंच पर बहुत से महिला को मैने यानी रचना ने जोड़ा और बहुत सी इसको पढ़ कर खुद जुड़ी . इस पर जितना लिखा गया वो सब आज भी उतना ही सही हैं जितना जब लिखा गया .
१५ अगस्त २०११ से ये ब्लॉग साझा मंच नहीं रहा . पुरानी पोस्ट और कमेन्ट नहीं मिटाये गए हैं और ब्लॉग आर्कईव में पढ़े जा सकते हैं .
नारी उपलब्धियों की कहानिया बदस्तूर जारी हैं और नारी सशक्तिकरण की रहा पर असंख्य महिला "घुटन से अपनी आज़ादी खुद अर्जित कर रही हैं " इस ब्लॉग पर आयी कुछ पोस्ट / उनके अंश कई जगह कॉपी कर के अदल बदल कर लिख दिये गये हैं . बिना लिंक या आभार दिये क़ोई बात नहीं यही हमारी सोच का सही होना सिद्ध करता हैं

15th august 2012

१५ अगस्त २०१२ से ये ब्लॉग साझा मंच फिर हो गया हैं क़ोई भी महिला इस से जुड़ कर अपने विचार बाँट सकती हैं

"नारी" ब्लॉग

"नारी" ब्लॉग को ब्लॉग जगत की नारियों ने इसलिये शुरू किया ताकि वह नारियाँ जो सक्षम हैं नेट पर लिखने मे वह अपने शब्दों के रास्ते उन बातो पर भी लिखे जो समय समय पर उन्हे तकलीफ देती रहीं हैं । यहाँ कोई रेवोलुशन या आन्दोलन नहीं हो रहा हैं ... यहाँ बात हो रही हैं उन नारियों की जिन्होंने अपने सपनो को पूरा किया हैं किसी ना किसी तरह । कभी लड़ कर , कभी लिख कर , कभी शादी कर के , कभी तलाक ले कर । किसी का भी रास्ता आसन नहीं रहा हैं । उस रास्ते पर मिले अनुभवो को बांटने की कोशिश हैं "नारी " और उस रास्ते पर हुई समस्याओ के नए समाधान खोजने की कोशिश हैं " नारी " । अपनी स्वतंत्रता को जीने की कोशिश , अपनी सम्पूर्णता मे डूबने की कोशिश और अपनी सार्थकता को समझने की कोशिश ।

" नारी जिसने घुटन से अपनी आज़ादी ख़ुद अर्जित की "

हाँ आज ये संख्या बहुत नहीं हैं पर कम भी नहीं हैं । कुछ को मै जानती हूँ कुछ को आप । और आप ख़ुद भी किसी कि प्रेरणा हो सकती । कुछ ऐसा तों जरुर किया हैं आपने भी उसे बाटें । हर वह काम जो आप ने सम्पूर्णता से किया हो और करके अपनी जिन्दगी को जिया हो । जरुरी है जीना जिन्दगी को , काटना नही । और सम्पूर्णता से जीना , वो सम्पूर्णता जो केवल आप अपने आप को दे सकती हैं । जरुरी नहीं हैं की आप कमाती हो , जरुरी नहीं है की आप नियमित लिखती हो । केवल इतना जरुरी हैं की आप जो भी करती हो पूरी सच्चाई से करती हो , खुश हो कर करती हो । हर वो काम जो आप करती हैं आप का काम हैं बस जरुरी इतना हैं की समय पर आप अपने लिये भी समय निकालती हो और जिन्दगी को जीती हो ।
नारी ब्लॉग को रचना ने ५ अप्रैल २००८ को बनाया था

October 07, 2009

सलीम खान मै मुस्लिम धर्म अपनाना चाहती हूँ बशर्ते

सलीम खान मै मुस्लिम धर्म अपनाना चाहती हूँ बशर्ते की आप किताबी बान्ते छोड़ कर व्यवहारिक बातो मै मुझे ये कन्फर्म कर दे । मै ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं हूँ सो कुरान और रामायण के बीच की दूरी पर बात नहीं कर सकती लेकिन मुस्लिम धर्म कबूल करना हैं तो आप से बेहतर कौन होगा , यही सोच कर ये पोस्ट लिख रही हूँ । ईमानदारी से जवाब की अपेक्षा रखती हूँ ।

मै बुरका नहीं पह्नुगी
मै स्कर्ट , शर्ट , जींस पह्नुगी { हिंदू धर्म के ठेके दार अगर मुझे ये नहीं करने देते तो मै उनके मुह पर अपना सविधान मारती हूँ और अपनी पसंद के वस्त्र पहनती हूँ } क्या मुस्लिम धर्म कबूल करने के बाद भी मै अपने पसंद के वस्त्र पहने के मुलभुत अधिकार का प्रयोग कर पाउंगी ???

मै जब भी शादी करुँगी , मेरे जो भी बच्चे होगे उनके नाम के साथ मेरा भी नाम लिखवाया जाएगा { हिंदू धर्म के ठेकेदार नहीं करने देते तो फिर मै संविधान की बात करती हूँ } और मुझे मेरा अधिकार मिल जाता हैं । क्या मुस्लिम धर्म भी ये अधिकार मुझे देगा ??

मेरे पति को अगर ४ शादियाँ करना के अधिकार होगा तो क्या मुस्लिम धर्म मुझे भी चार शादिया करने देगा ? देगा ना सलीम भाई सच बोलना और ये ना कहना की औरतो के लिये ये ठीक नहीं हैं क्युकी मेरा संविधान कहता हैं की पुरुषों के लिये भी ये ग़लत हैं

मै एक वक्त भी नमाज नहीं पढूंगी और ना ही कुरान पढूंगी , हिंदू धर्म मै कहीं भी रामायण पढ़ने को जरुरी नहीं बताया हैं , क्या मुस्लिम धर्म भी मुझे मेरी अस्मिता के साथ रहने देगा ? बोलो सलीम भाई देगा ना ?

मै देर रात तक ऑफिस मै काम करती हूँ सो दस बजे दे पहले घर नहीं आ सकती , अब औरतो के काम करने मै तो किसी भी धर्म को कोई आपत्ति नहीं रहगयी हैं सो मुस्लिम धर्म को भी नहीं ही होगी मै ये मान कर चल रही हूँ पर भाई सलीम इसको कन्फर्म करदो , अब मुस्लिम धर्म कबूल करना हैं तो कांफिर्मेशन तो चाहिये ही ?

हाँ सलीम भाई एक बात तो भूल ही गयी , जब मेरी शादी होगी तो मेरे पति को मेरी चुन्नी पर पैर रखने का अधिकार नहीं होगा , मुस्लिम धर्म कबूल करने के बाद ये रियायत तो आप दिलवा ही सकोगे ना ??

मेरे अगर लड़की हो या लड़का , तो मुझे मुस्लिम धर्म ये अधिकार देगा ना की मै उनको मदरसे मे ना पढा कर किसी सरकारी स्कूल मे पढा सकूँ , ये अधिकार मिलेगा ना मुस्लिम धर्मं मे की मे अपने बच्चो का भविष्य सुरक्षित कर सकूँ ?

ये तो मेरी बुनयादी जरूरते हैं सलीम भाई , और क्युकी आप निरंतर बड़ी बड़ी किताबे पढ़ कर अपने ब्लॉग पर मुस्लिम धर्मं का प्रचार कर रहे हैं और उसमे औरत हिंदू धर्मं से ज्यादा महफूज रहेगी ये बता रहे हैं तो मेने सोचा आज आप से पूछ ही लूँ


और एक बाद ध्यान रखना सलीम भाई , आप के धर्म मे भी अगर एक औरत किसी को भाई कह दे तो उसको गाली नहीं देते हैं और ना ही उस से बदजुबानी कर ते हैं सो अगर एक भी अपशब्द आप का या आप की किसी भी मुस्लिम भाई का इस पोस्ट पर आया तो मै यहीं मानूगी की आप सच्चे मुसलमान नहीं हो

आप की बहिन
रचना
आप के जवाब के इंतज़ार मे



और
अगर ये सब बाते करना किसी नारी के लिये ठीक नहीं हैं और उसको इन प्रश्नों को कर का अधिकार ही नहीं तो भैया सलीम नारी को लेकर चिंतित ना हो क्युकी उसकी स्थिति हर धर्म मे कोई ज्यादा अच्छी नहीं और अपनी स्थिति को सुधारने के लिये नारी ख़ुद सक्षम हैं सके लिये नारी के सुधार की बात करने के बहाने मुस्लिम धर्म के प्रचार को ना आगे बढाये नारी को अपनी धर्म की बातो से दूर ही रखे


हेडिंग मे जो बशर्ते हैं वो कहता हैं " नारी अब अपनी जिन्दगी अपनी शर्तो पर जीना चाहती हैं "

69 comments:

  1. sahi he... salim "bhai" ke jabab kaa intajar rahegaa..

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  2. kaha hob guru salim bhai.hum to dharam varam nahi mante par apne sahyogi indian express ke virendra nath bhatt jo pahale maar dalo ,kaat dalo bum, visfot aadi naam se blog banane par vichaar kar rahe the kal hi bole islaam me koi darshnik kyo nahi hua.mahatma gandhi jaisa islaam me koun hua bataye.nmera javab tha aap samrdaik baat kar rahe hai .par aaj in bahanji ka vichaar dekh kar laga ki sawal to uthega hi .ab aap islaam ke nazariye se jarur apni baat rakhenge.

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  3. बहन रचना, आपने सवाल किया और बहुत अच्छा सवाल किया. मैं अभी आज सिर्फ दो बातें ही कहना चाहता हूँ, इंशा अल्लाह आपके सारे सवालों का जवाब दूंगा.

    १. बहन रचना, मैं आपको बताना चाहता हूँ कि जिस धर्म को आप अपनाना चाह रहीं हैं वह मुस्लिम धर्म नहीं है बल्कि इस्लाम (दीन-ए-इस्लाम) है. इस्लाम का मायने होता है शांति और मुसलमान का मतलब होता है अपनी सम्पूर्ण इच्छाओं को परम शक्ति संपन्न अर्थात अल्लाह के प्रति समर्पित करना

    २. आपको इस्लाम धर्म की कौन सी ऐसी बात प्रभावित कर रही है जिसके कारण आप इस्लाम धर्म क़ुबुल करना चाहती हैं? मैंने यह व्यक्तिगत तौ पर सवाल किया है, इस्लाम क़ुबुल करने के लिए इस सवाल से कोई ताल्लुक नहीं है.

    आपका छोटा भाई
    सलीम खान

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    1. slim ji aapne rachna ji ki bato ka achhe se jwab nahi diya...

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  4. रचना जी, धर्म बेहद निजी और व्‍यक्तिगत मामला है, आप जैसे और जहां रहना चाहती हैं रहें, कौन किसी को रोक सकता है। क्‍या मुझे कोई रोक सकता है मेरी तरह से जीने और मेरी आस्‍था को निभाने से:::।

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  5. salim khan islam ke adna se pracharak hai jo apni trp badha rahe hai islam jagat ke blogro me .islam ke itihash ki inhe ratti bhar samajh nahi hai .pahle devbandi aur barelvi ke vivaad ke bare me bataye fir aage badhe.

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  6. आपको दुबारा लिखते देखकर खुसी हो रही है ..आप अपने चिर परिचित मारक/आक्रामक अंदाज में नारी में वापस आईं खुसी हुई ..पर रचना जी जवाब तो आपको मिलने से रहे ..यह आपको जल्द पता चलेगा ..हम वेट एंड वाच की स्थिति में हैं

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  7. रचना जी ... जवाब मिला? आज तक ये लोग कभी सीधा बोलें हैं जो आज बोलेंगे | एक और पागल उमर को भी देख लीजिये |

    वैसे आपने बढिया लिखा है ... पर बेकार वो समझेंगे ही नहीं .....

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  8. Rachna ji,
    Bahot afsos hua 'Kairani' ke baat karne ke andaz ko dekh kar. Aapke sawal ghalat nahi hain, lekin "k" ne unhe hal karne k bajay be-hadd halkepan ki baat ki.
    Aap ke kuchh sawalon ka jawab bilkul 'nahi' me hai, Islam mard aur aurat dono ko public me shareer dhakne ko kehta hai. lekin talibani dhang se nahi...bas apni 'satar' ki raksha karne ko. Burqe, Naqab, Hijab, adi adi kuchh 2-3 shati se aaey hain bas. Islam me nazar k parde ki baat hai, matlab kisi ghair male/female par hawas ki nazar na dalo.
    Rahi baat aapke naam badalne ki to Islam akela aisa dharm hai jahan insaan ki pehchaan sirf 'maan' k naam se hai, baap ke naam se nahi.Day of Judgement me bhi har insaan apni maa k naam se jana gaeyga, baap ka naam kahin nahin.
    Doosrey shadi k baad Pati ka naam lagane ka chalan ek ghair-Islami practice hai. Islam me shadi k baad naam badalne ki koi hidayat nahi. Agar koi islam dharm apnata hai to usey apna naam badalne ki bhi zaroorat nahi.
    Khud Prophet Muhammad ne bhi apna pre-Islamic naam nahi badla, na unki biwi ne, na bhaiyon ne,na aur kisi ne, kyunki naam ka talluq bhasha/zaban se hai. Khud mera naam Islamic nahi balki 'Yahudi' (Jewish) hai. Yaqub, Ishaq, Dawood, Sarah, Sheeba, Ibrahim, ye sab Jewish naam hain jo Musalman khoob rakhtey hain.
    Islam me aurat ghar k bahar kaam kar sakti hai, sena me bharti ho sakti hai, business kar sakti hai, apni pvt property khareed/bech/rakh sakti hai.

    Aap 5 time ki namaz nahi padhengi to bhi musalmaan hi rahengi.
    Quran nahi padhengi to bhi musalman hi rahengi aur aapko koi majboor nahi kar sakta.
    Sirf yeh vishwas zaroori hai ki "Allah ek hai, aur Muhammad us ke Rasool (sandeshwahak/Paighambar) hain." Bassss!

    Agar Pati doosri shaadi karey to aap uski tabiyat se thukai kijiye aur Islami qanoon usme aapka saath dega kyunki Quran kehta hai ki Allah ko yahi pasand hai ki tum (mard) ek shaadi karo.

    Puri quran me sirf Biwi/beti/ maan k adhikar hain aur pati/ beta/ mard k farz, yani duties to keep their women happy.

    Sangsaar ki saza bhi un-Islamic hai jo ki pre-Islamic practice thi.
    There is no sanction of physical abuse or corporal punishment to women by society or law in Islam.

    Mushkil yeh hai ki mardon ne Quran ki vyakhya apne anusar kar rakhi hai aur 4 shaadi, triple talaq, talibanikaran ko hi Islam bana kar samne latey hain.
    Inke gorakhdhandey yahi hain.
    But if u r interested in understanding Islam plz get a translated Quran in Hindi or English and read it yourself.
    Mera maqsad Islam ka prachar nahi tha, lekin 'Kairanwi' ki harkat bahot na-gawarguzri. Aisey log Islam ka mardwadi chehra hi sajaey ghoomtey hain.
    Post zyada lambi ho gayi...maafi!
    Sheeba

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  9. Ambreesh ji, Rakesh ji, Muslim kattarwadiyon k munh na lagen, inhe zara lehaz nahi ki Bharat me Bahusankhyak samaj hi Muslim samaj ka sabse bada hitaishi hai, warna poora bharat Pakistan jaisa ho jata.
    single culture ya mono-culture society me sankeernta ghar kar jati hai, aur chootey-pan ki, tang-nazri ki koi seema nahi, usi tarah multi-culture samaj hi healthy aur dynamic ho sakta hai. Badappan ya khula-dil rakhne se insaniyat panapti hai.

    Hindustani musalman ya Isai, ya Sikh, Ya sanatani, ki pehli pehchan ek 'Hindu' ki hai, baad me kuchh aur.
    Yeh desh tamam Muslim countries se bahot bahot achha hai.

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  10. kaise kaise utawle 'samajhdar' Musalmaan maujood hain yahan...? Hadd hi ho gayi....ab yeh Heidi Donna kahan se aa gaye Islam failaney.
    Rachna ji aap jahan hain wahin theek hain.... is raftar se to sari duniya ko yeh do din me Musalmaan bana dalengey....aur yeh bahot bura hoga....Duniya rang-birangi hii achhi.
    'Musalmaan Bhaiyon Bakhsh do is Blog-Duniya ko!'

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  11. रचना जी आपके आपके प्रश्‍न ऐसे है जो नारी की भवनाओं की ओर ले जाते है किसी भी धर्म में अभी नारी को म‍हत्‍वपूर्ण स्‍थान नही मिला है जो भी है थोडा बहुत हिन्‍दू धर्म में ही है।

    आपके भाई जान सलीम में दम नही कि इस्लामिक सेक्‍स शास्‍त्र को बदल सके और आज की सच्‍चाई में जी सके।

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  12. शत-प्रतिशत सहमत !!
    प्रश्नों के सहारे सार्थक पोस्ट !!
    दरअसल समस्या तो सभी धर्मों में हैं .... जो उनके ठेकेदारों के कारण हैं ;पर इस्लाम में और धर्मों के विपरीत जड़ता इस हद तक घर कर गयी है , की वह किसी भी रूप में आत्म्वोलकन करने को तैयार नहीं है !!

    बाकी सलीम भाई प्रचार करें ...इसमें उतनी बड़ी आपति नहीं है?
    शायद isee से dharmik आत्म्वोलकन का raasta khule?



    मनाया तो हमने भी हैप्पी बर्थ डे कुछ इस तरह

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  13. सब जगह बस यही हंगामा हो रहा है क्या हो गया है हमारी ब्लॉग दुनिया को । अरे भई इन सबको नजरअंदाज कर दो और अपने काम पर लगे रहो, जब कोई इन्हें पढ़ेगा ही नहीं तो ये कैसी भी धार्मिक, घटिया, असहिष्णुता या सांप्रदायिक बातें कर लें कोई फ़र्क नहीं पड़ता है। टिप्पणी में मोडरेशन का अधिकार प्रयोग करें, उसके लिये मोडरेशन लागू करने की जरुरत नहीं जहाँ धार्मिक विज्ञापनबाजी देखो वहीं उसका उपयोग कर लें। और जो मानसिक बीमार है उन्हें कितना भी ज्ञान दे दो, बेईज्जती कर दो उन्हें कोई फ़र्क नहीं पड़ता है। केवल इसका एक मात्र इलाज यह है कि इन लोगों के ब्लॉग पर न जायें, टिप्पणी देकर इनका और हौंसला न बढ़ायें। इनके ऊपर पोस्ट न लिखी जाये, और जहाँ भी इनकी टिप्पणी देखें उसकी भर्त्सना करें। जय हिंद

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  14. प्रवीण शाह थैंक्स आप ने पोस्ट के मंतव्य को समझा
    लवली जिस प्रकार से औरत को ले कर धार्मिक प्रचार हो रहा हैं उस से कुछ बुनियादी प्रशन हैं को जो वस्तिविकता से जुडे हैं बात उनकी क्यूँ नहीं होती कुरान और रामायण मे नारी जो थी क्या आज भी हैं ?

    सलीम मैने आप से किताबी बातो से हट कर औरत की बुनियादी जरुरतो पर बात की हैं अगर कोई भी धर्म हिंदू हो या मुस्लिम आरत की बुनुयादी जरुरतो को नहीं पूरा कर सकता तो सम्झ्यिए की उस धर्म से आगे निकलने मे ही फायदा हैं ।

    सच्चा मुसलमान अपनी पत्नी के अलावा किसी की बात नहीं करता और धर्म का प्रचार नहीं करता हैं वो केवल और केवल खुदा की इबादत के लिये पैदा हुआ । खुदा की इबादत का मतलब हैं इबादत नाकि मुस्लिम धर्म का प्रचार हिंदू धर्म को तलवे के नीचे रख कर ।

    बहुत जगह हैं इस देश मे शान्ति से रहने के लिये क्यूँ अशांति बाधाओं , जब तक बुनियादी जरुरतो की बात नहीं कर सकते हर कित्ताब महज कित्ताब हैं धर्म ग्रन्थ नहीं

    बाकि आप के अन्य सच्चे मुसलमान औरत के मामले मे कमेन्ट मे भी कितने गये बीते आप ने देख लिया सो अब कमेन्ट delete कर रही हूँ उनके

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  15. Heidi Donna
    आप को तो पोस्ट का मंतव्य ही समझ नहीं आया हैं आप से क्या कहूँ

    raakesh singh
    naari ki sthiti par har dharm sae yahii buniyadi swaal haen maere , hindu dharm kyuki constition kae andar aata haen so wahaan atlleast ham lad to saktey haen apane adhikaar kae liyae india mae

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  16. maha shakti aur vivek rastogi

    bahut bahut thanks is vivadit post par kament karnae kae liyae

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  17. kisi bhi kament agar link hoga yaa bad jubaani hogii to wo delete hi karna hota haen vahii kiya haen

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  18. मैं व्यक्तिगत रूप से सदैव इस बात का समर्थक रहा हूँ कि सभी को स्वतंत्रता का अधिकार है कि वह अपनी स्वतंत्र चेतना का विकास कर सके। जिस समाज में स्त्री को जितना अधिक सम्मान और स्वतंत्रता होती है वह समाज उतना ही अधिक विकास करता है। स्त्री को स्वतंत्रता उस पर उपकार नहीं है यह उसका अधिकार है। पश्चिम के विकास और प्रगति का कारण यही है कि उसने स्त्री को शक्तिसम्पन्न किया है। हिन्दू धर्म में सिद्धांत रूप में स्त्री के अधिकार और सम्मान की बात है लेकिन अब उसे व्यावहारिक स्वरूप देने का अवसर आ गया है। आप जैसे लोगों के प्रयास और साहस से ही यह सम्भव हो सकता है।

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  19. रचना जी आपके सवाल सही है मगर आप ये पूछ किस से रही हैं?उनसे जिनकी बात उनके ही भाई-बहन नही मानते।उनके धर्म की अच्छी बाते अगर उनके धर्मावलंबी सही माय्ने मे मान ले तो उन्हे किसी दूसरे धर्म की ओर झांकने की ज़रूरत ही नही पडेगी?सलीम भाई और उनके भाई-बंद अपना ही घर सुधार ले फ़िर बाकी अडोस-पडोस को देखें तो ठीक रहेगे।सुधारवादी मुसलमानो को खटमल,खुर्रा,चौबीस नंबरी कह कर रिजेक्ट करने की बजाय उनहे अपनी कट्टरपंथी घुट्टी पिला लें फ़िर हिंदू या और किसी धर्म के बारे मे बोलें तो मेरे खयाल से ठीक रहेगा।आपको इस सटीक और तर्क़्संगत पोस्ट के लिये बधाई।

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  20. विवेक रस्तोगी जी की बात से मैं पूर्णतः सहमत हूँ।

    ये एक बहुत बड़ी साजिश है हिन्दी ब्लॉग दुनिया को प्रचारतंत्र बनाने की। कुछ लोगों का उद्देश्य ही है कि अन्य लोगों को येन-केन-प्रकारेण उकसाओ, अनाप-शनाप लिख कर खुन्दक में लाओ और अपनी रोटी सेंकते रहो। यह ठीक वैसा ही है जैसे कि स्वार्थी तत्व अपने स्वार्थ के लिए साम्प्रदायिक दंगे फैलाते हैं, ऐसे लोगों की किसी भी धर्म, सम्प्रदाय, मजहब में आस्था नहीं होती, ये सिर्फ अपना स्वार्थ साधते हैं।

    और दुःख की बात तो यह है कि ये अपनी साजिश में कामयाब होते जा रहे हैं। हम सभी को बरगला कर रख दिया है इन्होंने। हम सभी के भीतर कुंठा और आक्रोश भरते जा रहा है। ये हमारे हिन्दी ब्लॉग जगत में गृह युद्ध मचाने में शनैः शनैः सफल होते जा रहे हैं।

    सभी ब्लॉगर मित्रों से अनुरोध है कि अब भी चेतें। समझदारी सिर्फ इसी में है कि हम सभी मिलकर इनका बहिष्कार करें, न ऐसे लोगों के ब्लॉग में जाकर इनका लिखा पढ़ें और न ही इन्हें अपने ब्लॉग में टिप्पणी करने दें। टिप्पणी मॉडरेशन हमारा अधिकार है और हमें चाहिए कि हम अपने इस अधिकार का भरपूर प्रयोग करें।

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  21. आपने एक बात में जबाव दे दिया है कि हिन्दू / सनातन धर्म संविधान के अर्न्तगत है अतः इससे अधिक सुरक्षा नारी को कहीं और मिलना भारत में संभव नहीं है . बाकि अब तक जितने भी लोग इन धर्मभिरुओं पर लिखते आये हैं उनमें आपकी पोस्ट हमें सार्थक लगी . अब आग्रह है इन पागल लोगों को इनके अँधेरे कुएं में छोड़ दिया जाए जब ये निकलना हीं नहीं चाहते ! इनको पढने की जरुरत नहीं है .

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  22. सचमुच मज़ा आ गया कुछ अच्छा पड़ने को मिला रचना जी के प्रश्न और शीबा जी के उत्तर शीबा जी भी बधाई की उतनी ही पात्रा है जितनी रचना जी लेकिन शीबा जी से मेरा यह प्रश्न है की जब आप इतनी समझ रखती है अपने मज़हब की तो फिर इन कठमुल्लाओ के अनुसार क्यों चलती है मेरा मतलब यह की की शीबा जी मेरे लिए पूरी मुस्लिम महिलाओ का प्रतिनिधित्व कर रही है मेरा प्रश्न एक प्रतिनिधि से है जो मुस्लिम समाज की समझ रखती है. रही बात सलीम भाई की तो वो केबल आइ आर एफ के अनुसार बात करते है और जिन किताबो का वो हवाला देते है वो सिर्फ़ आइ आर एफ से कॉपी पेस्ट किए हुए होते है उनकी खुद की कोई समझ नही है जो कुछ आइ आर एफ मे पब्लिश होता है उसी को कॉपी पेस्ट करने का काम है उनका रही बात हिंदू बुढ्ढिजीविओ की तो मे हिंदू होते हुए भी क़ुरआन का थोड़ा बहुत ज्ञान तो रखता हूँ मे कोई आलिम नही हूँ एक इंसान हूँ और सिर्फ़ एक इंसान बना रहना चाहता हूँ ना की हिंदू या मुसलमान या कोई और

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  23. dharyti iti dhrma. arthat jo krne yogy hai vhi dharm hai.niymion, kaydon mein bandha ho voh nhi hai dharm. use sanha dena hi hai to majhab khna uchit hai. islam majhab hai dharm nhi.hindi main smprday kh lijiye. jaise sikh bhi dharm nhi smprday hai. jha fouj ki tarh rule aur kattar anushasan hain voh majhb. jise hum hindu dharm khte hai. asl mein vo vedik ya snatan dharm hai. isiliye usme vividhta hai. sbke liye dhrm ek sa nhi ho skta. jaise aag ka dharm jlana aur pani ka dharm bujhana ya sheetal krna hai. rachna ji jis samvidhan ki baat kar rhi hain gadbad usme bhi hai. usme majhab aur dharm ka ek hi arth man liya gya. yhi anarth ho gya. rha aapke swalon ka jabab to salim bhai to nhi hi de payenge. koi aur de paye to hum bhi intzar krenge.

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  24. एक और बढ़िया बहस! रचनाजी, जो सवाल आपके हैं, वो कमोबेश हर मज़हब पर लागू होते हैं। शीबा जी ने बेहतरीन तरीक़े से अपनी बात रखी है। हिंदू हो या इस्लाम या कोई और धर्म, ज़रूरत शीबा जैसे लोगों की ही है जो कट्टरता को छोड़ कर एक inclusive समाज को बनाने में मदद कर सकें।

    और बाक़ी, मैंने कहीं पर टीआरपी फ़ैक्टर का ज़िक्र किया था। आप जब तक ऐसे ब्लॉग्स को टीआरपी देती रहेंगी, वो और दुष्प्रचार करते रहेंगे।

    कभी मौक़ा लगे तो 'ख़ुदा के लिए' फ़िल्म देखिए। इस मज़हब को लेकर कई ग़लतफ़हमियां दूर होंगी। मुस्लिम भाई, ख़ास तौर पर देखें। फ़िल्म बनी भी बढ़िया है- कोई प्रवचन के अंदाज़ में नहीं।

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  25. बहन रचना, जिस धर्म को आप अपनाना चाह रहीं हैं वह मुस्लिम धर्म नहीं है बल्कि इस्लाम (दीन-ए-इस्लाम) है. इस्लाम का मायने होता है शांति और मुसलमान का मतलब होता है अपनी सम्पूर्ण इच्छाओं को परम शक्ति संपन्न अर्थात अल्लाह के प्रति समर्पित करना.

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  26. Rachna ji,
    Is desh ke stree-pakshee qanoon hi streeyon ki mukti kitabeer hain. Yeh ek loktantra hai jahan kisi bhi dharm ke qanoon nahi chalengey isliye yeh bahes sachmuch bahot polemical ho sakti hai aur junooni log to zabaan par qabu bhi nahi rakh saktey.
    Rohit ji, main Musalmaan zaroor hun, lekin ek padhi-likhi insaan bhi. Aur padhai ka matlab sirf M.Phil, PhD nahi balki Islam bhi padha hai. Isliye main kisi bewaqoof Mulley k bataey huey Islam par nahi chalti. Jo baat tark sangat nahi , jo mujhey ek insaan k roop me doosre se kamtar samjhey woh mujhey manzoor nahi.
    Islam ki streewadi vyakhya abhi tak nahi hui, jiski main ek mamooli koshish kar rahi hun. Agar 'Hans' patrika se koi aitraaz na ho to wahan mera column last Feb09 se 'Gender Jihad' naam se chhap raha hai, aur usme jo debate generate hui hai woh bhi bahot sawalon ka jawab degi.
    Agar dharm ko stree par hukumat k liye istemaal kiya jaeyga to uski kaat mere paas dharm se hi hai.
    Quran se nishkarsh nikalne par mardon ka copyright nahi hai.
    Basss!

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  27. कोई भी लिंक दीये बिना अपनी बात कहे सलीम तो कमेन्ट delete नहीं होगा । बात किताबी ज्ञान की नहीं हैं बात हैं नारी के अस्तित्व की और आप के ये प्रचारित करने की नारी मुस्लिम धर्म मे सबसे सुरक्षित हैं । मुझे क्या padhna haen क्या नहीं ये मेरा निजी मामला हैं , आप केवल और केवल मेरे प्रश्नों का उत्तर दे या ये maan ले की आप केवल अपने ब्लॉग प्रचार कर रहे हैं । किताबे तो बनी ही पढ़ने के लिये हैं पर पर इंसानियत कहती हैं जिस देश मे रहो उसका नियम मानो और जो देश आप को इतनी सुविधा देता हैं की आप के धर्म को भी मान्यता देता हैं उसी देश के लोगो को आप बेवकूफ कह रहे हैं ।

    जवाब नहीं दे सकते तो कह दे हां कोई भी धर्म मुस्लिम ही क्यूँ ना हो औरत को केवल और केवल एक खिलौना समझता
    किताबी ज्ञान नहीं सलीम भाई व्यवहारिक बात केरे और बिना लिंक दिये टिप्पणी करने की आदत डाले

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  28. रचना जी आपने सवाल भारत के संविधान के दायरे में और उसे मुंह पर मारने के सन्दर्भ में पूछे हैं, इसलिये जवाब मिलने के चांस कम ही हैं, शरीयत के अनुसार पूछतीं तो मिल जाते…

    हिन्दी ब्लाग जगत में लगभग 3 साल हो गये, लेकिन आज तक किसी भी ब्लागर (ब्लागरों) की ऐसी छीछालेदार नहीं देखी, मोहल्ला भी इन्हें बाहर का रास्ता दिखा देता है, तब भी इनका स्वाभिमान नहीं जागता। हिन्दी ब्लाग जगत में अधिकांश लोग इन्हें पसन्द नहीं करते, फ़िर भी पता नहीं…

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  29. salim aap bina apane blog kaa prachaar kiyae kyaa baat nahin kar saktey

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  30. अब सही कहा आपने की सलीम का मकसद केवल और केवल लोकप्रियता बढ़ाना हैं ना की किस बात पर स्वस्थ बहस करना । मेरी पूरी पोस्ट मे उनकी किसी बात को कुतर्क नहीं कहा गया हैं फिर आप किस अधिकार से तर्क और कुतर्क का फैसला कर रहे हैं ।

    ब्लॉग लिखने का मकसद क्या हैं लोकप्रियता इस सच को कबूलने की हिम्मत तो की आपने वाह

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  31. vaesae salim lokpriyae ho kar kyaa karaegae yae nahin samjh aaya

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  32. आपको अगर अपने प्रश्नों के उत्तर मिल गए हो तो मुझे भी समझा देना. वास्तव में वे उत्तर में क्या कहना चाहते हैं, यह समझ नहीं आया. सवाल सीधे सरल थे, जवाब भी वैसे ही होने चाहिए.

    मेरी पत्नि, न सिंदुर भरती है, न घुंघट निकालती है, न मंगलसुत्र पहनती है. न मन्दीर जाती है, न व्रत रखती है. न गीता पाठ करती है. फिर भी हिन्दू/जैन है. क्या ऐसा इस्लाम में सम्भव है?

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  33. इस्लाम कुबूल करने में कोई शर्त नहीं होती. हाँ सिर्फ एक शर्त और वो कि अपनी सारी शर्तें / इच्छाएं अल्लाह के प्रति सपर्पित करना. आपकी कोई भी इच्छा अल्लाह की इच्छा के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं होनी चाहिए......Khurshid Ahmad

    Aur 'Allah ki Ichha' ko define kaun karega???? ek jahil puratanpanthi Mulla? Aur sab padhey-likhey, Doctor, Engineer, Scientist, Philosopher, Thinker, usey maan len? Ya we khud bhi Islam ki sahi aur insaan-upyogi vyakhya kar saktey hain....? 'Allah ki marzi ya Ichha ka pata sirf Mulla ko ho sakta hai' meri aapatti itni hi hai.
    Baqi dharm personal mamla hai, mere Allah se mera ta'alluq niji hai.

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    1. अगर इस्लाम मैं कोई सच्चाई होती तो मुस्लिम शाषक और उनके सहयोगी कोई सेनापति, तोपची, कोई मंत्री,( दारा शिकोह, कबीर, रहीम, रसखान ) अपनी इच्छा से न तो हिन्दू होते और न कुरान को छोड़कर वेद , उपनिषद, गीता , और श्री क्रिशन की लीलाओं का वर्णन करते। भागता वो है जो भूखा होता है।।।और ये सब सनातन धरम मैं संतुष्ट भी हुए।।इन्होने वो पाया जो कही नहीं नहीं मिला।।

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  34. This comment has been removed by the author.

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  35. Rachnaaji, you are unnecessarly wasting your time. This bas* is not only sluring mud on hinduism but damaging the image of islam also.

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  36. achhe sawal uthane ke liye rachna ji ko dhanyavad,
    Sheeba ji ke comment dekhkar khushi hui...kathmullo ke virodh me unke bahumulya vichar Main "Hans" me "Gender jihad" column ke ek lekh me padh chuka hu...
    Lajabaw. :-)

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  37. इस तथ्य से भारत के लोग भलीभांति परिचित हैं कि सर्वथा शांतिप्रिय, अहिंसक,दोस्ती का व्यवहार करने वाला ,जीवदया का प्रचारक होने पर भी भारतवासियो ने जिस प्रकार बौद्ध धर्म को सहर्ष स्वीकार नहीं किया ! क्यूँ ? यह एक ऐसा प्रश्न है जो आज भी अनुतरित है ! इसी प्रकार इसलाम धर्म को फैलाने लिए कितना भी साम, दाम, दंड,भेद अपनाया गया लेकिन उसको अधिकांश भारतवासी आजतक सहर्ष स्वीकार नहीं पा रहे हैं ! क्यूँ ? यह भी एक ऐसा प्रश्न है जो आज तक अनुतरित है ! क्यों कि इसलाम के प्रति श्रद्धा- भाव रखते हुए इस धर्म में जाने वालों कि संख्या नगण्य ही है ! इसी प्रकार हिन्दू धर्म को कुचलने के लिए बहुतों ने बहुत जोर लगाया लेकिन वे इस लेकिन वे इस धर्म को खत्म नहीं कर पाए ! आखिर कुछ तो बात है इस हस्ती में कि मिटाए नहीं मिट पाती !

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  38. इस पूरी बहस में शीबा की बातें सबसे ज्यादा तार्किक लगीं और ...बात वही है कि औरत को कोई धर्म नहीं, समाज दबाता है और उस सामाजिक दबाव को सहने के बाद भी सिर उठा कर जीने का दम तो औरत को खुद ही जुटाना पड़ता है।

    लेकिन जो असल मुद्दा था कि (बिना संदर्भ-लिंक देखे, मान कर लिख रही हूं, गलत हो तो माफी) ब्लॉग में एक धर्म को नीचा दिखा कर दूसरे को बेहतर बताना, तो वह तो सनातन प्रक्रिया है, हर धर्म के कठमुल्ले यह लगातार किए जा रहे हैं। एक बार की लानत-मलामत से संभलने वाला मसला नहीं है यह। सोच बदलनी होगी, सिरे से बदलनी होगी। वरना ऐसे ही नवेली की चुनरी को रौंदा जाएगा और पति की बेहतरी के लिए पत्नी को पूरे दिन भूखा रखा जाएगा। (कल करवा चौथ था, उत्तरी भारत की महिलाएं इसके बारे में जानती होंगी।)

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  39. Is zordaarise apni baat kehne ka aapka andaaz pasand aaya....

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  40. अनुराधा जी मैं आपकी यह ग़लतफहमी दूर करना चाहता हूँ की करवा चोथ किसी विवाहित महिला को ज़बरदस्ती करवाया जाता है यह कोई ज़बरदस्ती का सौदा नही है यह अपने प्रियतम के लिए प्यार और त्याग का त्योहार है और क्र्पा करके भारत को उत्तर और दक्षिण मे ना विभाजित करे. पुरुष भी करवा चोथ का व्रत रखते है और अविवाहित लड़कियाँ भी. आपकी जानकारी कुछ अधूरी है क्र्पा कर सही करे लिखने से पहले सोचना ज़रूरी है नही तो आप भी सलीम की तरह बाते करने जैसी लगेगी

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  41. Alam Ji, is tarah ki bhasha theek nahi. Tarkvihin aisa kartey hain.
    Yeh bhi ek sachchai hai ki jab bhi gender justice ki baat hogi Dharm, Rajya, Sanskriti, Parampara adi ko khul kar interrogate karna hi hoga. Jahan se utpeedan aur dabav aa raha hai usey nazarandaz nahi kar saktey.
    Lekin balance nahi khona chahiye. Jab Qanoon, authority, system, Prisons, sudhar-grah, hospitals, welfare-state, Rights to all, Justice system etc. nahi they tab dharm ne aham role ada kiya insaniyat ki khidmat me.

    Aaj bhi insan upyogi baten chahen dharm se aaen ya parampara se ya modernity se sabka swagat hai.

    Aurton ki azadi ki ek aham kadi 'talaq' ya 'divorce' jaisa pravdhan hai jo Islam se aaya par har samaj ne apna liya. Christianity, Hinduism me 'divorce' nahi tha par kisi ko apatti nahi ki ab hai.

    Christianity ne manav-matr ki sewa ko sari duniya me phailaya, Kya aaj Hindu nurse kisi musalman, ya Isai, ya dalit ya Sikh mareez ki sewa se inkar kar sakta hai?

    Hum shikshit log santulan na khoen to samaj ko bhi kuchh achha de sakengey.

    Kam se kam bhasha ka istemal jakhm bharne me kijiye. bahes jeetna dost aur dil harna na ban jaey.

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  42. मैं तो कहता हूँ सलीम जी की बढती हुई लोकप्रियता का फायदा सब ब्लोगरो को उठाना चाहिए.. आखिर एक ब्लोगर ही ब्लोगर के काम आता है..

    @ रचना जी
    ऐसे छोटे मोटे सवालों के लिए वेद ज्ञाता सलीम खान 'हिन्दू' को तकलीफ देने की क्या आवश्यकता है.. किसी बच्चे से पूछती आप तो वो भी बता देता..

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  43. इस पोस्ट को लिखने का मकसद किसी भी धर्म को अच्छा या बुरा साबित करना नहीं हैं । राम रहीम कृष्ण करीम यशुमति और इब्राहीम सब एक बराबर होते हैं फिर उनको compare करके एक को बड़ा / अच्छा और छोटा / गन्दा साबित कर के हम केवल और केवल उनका अपमान ही करते हैं ।


    इंडिया का कानून सबके लिये एक सा हैं यहाँ रहने वालो को उस कानून को मानना चाहिये

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  44. मेरी एक पोस्ट पर अर्ज ज्ञानदत्त जी की टिप्पणी में ही सार है |

    ज्ञानदत्त पाण्डेय ने कहा .

    " जितना इस तरह के लोगों का उल्लेख करो, उतना भाव खाते हैं। इनकी खराब पब्लिसिटी इनकी पब्लिसिटी है! "

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  45. भाई जी , आपके ब्लॉग पर जो भी पोस्ट आती है सारगर्भित होती है.आजकल कई जगह कुछ ब्लॉगर भाई इन जैसे अन्य कुकर्मियो के कृत्य से दुखी होकर उनके नाम से पोस्ट पर पोस्ट ठेल रहे हैं . ऐसे में उनका ही प्रचार हो रहा है . कृपा कर अब सभी लोग इस दो पागल धर्मभिरुओं के ऊपर लिखना बंद करें सब ठीक हो जायेगा . मुद्दों की कमी नहीं है हम खुद कहते हैं धर्म पर इस तरह अनर्गल बहस बंद हो परन्तु दूसरे ही दिन इसी बहस में कूद पड़ते हैं ! क्या हमारे दिन इतने फ़िर गये हैं कि किसी कट्टरपंथी के नाम से पोस्ट लगनी पड़े . मैंने अपने दिल की बात कह दी आशा है आप आग्रह को ठुकरायेंगे नहीं

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  46. आपने सवाल तो सही पुछे मगर गलत आदमिसे इस इश्यू के वजह से सलीम खान एक नई पोस्ट
    लिखेगा जीस मे पचास जवाब होंगे मगर आपने पुछे हुए सवलोन्के छोड के बाकी सभी सवलोन्के
    होंगे और वोह भी गलत जवाब हमेशाकि तरह पता नही उसे हर सवलका जवाब क़ुराण मे किस तरह मिल जाता है मै तो उस से हैराण हुआ हूं अगर उसने कौन बनेगा करोडपती मैं ट्राइ
    किया होता तो वह करोडपती बनहि जाता उसके पास जो हर सवाल का जवाब देणे वाली किताब है

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  47. आपको साधुवाद देने को मन मचल उठा है....आपने यक्ष प्रश्न पूछे हैं...

    लेकिन समस्या यह है कि आज हर भारतीय इन प्रश्नों और इनके व्यावहारिक उत्तरों से पूरी तरह वाकिफ है...बाकी इनके साथ बहस में पड़ कर हम अपनी उर्जा का क्षय ही करेंगे...
    सभी जानते हैं ये सब इनके लोकप्रियता कमाने के हथकंडे हैं....इन्हें अनावश्यक इम्पोर्टेंस बिलकुल न दें...

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  48. कौन धर्म अच्छा है कौन धर्म बुरा है इसके समझने के लिए दारू पीना जरूरी है....दारू पीने के बाद आपको रिफ्लेक्शन होगा...हो सकता है आप खुद रिफ्लेक्ट करें या फिर आपके दिमाग के तार किसी अनजाने सेटेलाइट से जुड़ जाये....यदि आप दारू नहीं पीते हैं तो भी चिंता करने की जरूरत नहीं है...आप आराम से घंटो, महीनों और दिनों अकेले बैठे रहिये...जब आप अकेले बैठेंगे तो रिफ्लेक्शन की यह प्रक्रिया होगी ही, कुछ समय लग सकता है...बुद्ध को छह साल के बाद रिफ्लेक्शन हुआ था...मोहम्मद साहेब भी उन्ही के समकालीन थे....इन दोनों ने रिफ्लेक्शन को अपने तरीके से आबजर्व किया और फिर उसे कार्यात्मक रूप में लाया...मठ और मुस्लिम का मामला कुछ इसी तरह का है...अब उस व्यक्तिग रिफ्लेक्शन को छोड़ कर लोग लोग मठ और मुस्लिम के चक्कर में उलझ गये...खैर उलझे रहे अपना क्या....रोम के पोप भाई लोग मरे हुये लोगों को को सीधे स्वर्ग भेजने के लिए क्षमादान नाम का टिकट बेचने लगे थे...मार्टिन लूथर ने बवाल मचाया..तब प्रोस्टेंट का जन्म हो गया...लगता है कि मैं कुछ बेहुदगी भरी बातें कर रहा हूं,,,लेकिन करूं भी क्यों नहीं...रचना जी आप इस्लाम स्वीकार करना चाहती है ...आप इस तरह से इस्लाम को ठोक बजा रही हैं जैसे आप बाजार से आलू या प्याज खरीदने जा रही हैं...सलीम जी अल्लाह के प्रति समर्पित होने की बात कर रहे हैं...यह वही अल्लाह है जो कभी मुसा को दिखाई नहीं दिया, कभी मोहम्मद को दिखाई नहीं दिया...बीच में जीसस ने खुद को उसका बेटा करार देकर तमाम तरह की बातें की....जीसस के नाम पर दुनिया भर में चर्च का संगठन खड़ा हो गया...और मोहम्मद ने अल्लाह के नाम पर लोगों को तलवार पकड़ा दिया...इन लोगों ने जो मार काट मचाया है उसका हिसाब किताब नहीं है...रही बात हिंदू धर्म की तो बुद्ध ने हिन्दू धर्म चाहे उसे सनातन धर्म ही कह ले या जो मन में आये कह ले से इतर हट कर मूर्ति पूजा का खंडन किया (इस्लाम में भी मूर्ति पूजा मना है...अल्लाह का कोई आकार नहीं है)लेकिन बाद में उनके अनुयायी बद्ध की ही प्रतिमा बना के पूजने लगे...ये सारे धर्म गड़बड़झाला है...कम से कम प्रैक्टिकल लेवल पर तो हैं ही...कोई कुछ बोलता है, कोई कुछ बोलता है...और जिसे बोलना नहीं आता है वो आपस में तलवारबाजी कर लेते हैं। रचना जी...आपने जो सवाल किये हैं,उससे एक अहम सवाल यह उत्पन्न होता है कि विभिन्न धर्मों में नारी की क्या स्थिति है...नारी के मामले में इस्लाम क्लोज डोर की तरह है...प्रारंभ मे बुद्ध ने भी संघ से नारी को अलग रखने की बात कही थी...ओल्ड टेस्टामेंट के पहले अध्याय में ही यह लिखा हुआ है कि नारी को सेब तोड़ने के लिेए पुरुष को उकसाने के कारण सजा के तौर पर गर्भवती होने का दंड दिया गया था...वैसे वेदों में नारी बहुत ही उन्मुक्त रुप से सामने आती है...ऊषा और अदिति...पिछले दिनों एक अमेरिकी महिला प्रोफेसर से चैट कर रहा था (धन्य हो कंप्यूटर देवता का जिन्होंने मानवीय कनेक्टिविटी को ग्लोबल बना दिया है)। वह सभी धर्मों पर काफी भड़की हुई थी...कह रही थी दुनिया में जितने भी धर्म है सभी का निर्मान पुरुषों ने किया है...शायद इसलिये सभी धर्म पुलिंग में है...धर्म के जितने भी तौर तरीके से सब फिजिकल विहैवियर में दिखते हैं...इस्लाम बुरका पहनाता है...यह इस्लाम का फिजिकल विहैवियर है...हिन्दूइज्म सिंदूर लगाने को कहता है यह हिन्दुइज्म का फिजिकल विहैवियर है...मार्क्स रटते रटते मर गया कि धर्म अफीम की तरह है...इससे इतना तो तय है कि उसने जरूर अफीम चखा होगा...खैर उसने क्या किया वो जाने...आप लोग धर्म को लेकर जो अक्कड़ बक्कड़ बम्बे बो खेल रही है ना उसका कोई नतीजा निकलने वाला नहीं है...धर्म बहुत सारे नियमों और कानूनों का संग्रह है...जिन्हें समय के साथ बदला जाना चाहिये...खैर मैं भरपूर दारू पीये हूं...दारू पीकर धर्म पर कुछ भी बोलना अर्धम ही होगा...उम्मीद है इस अर्धमी की बात को आप लोग गंभीरता से नहीं लेंगे....चलते चलते--

    न बुत होता, न बुत खाना होता
    न किसी किताब के जिंदा होने का बहाना होता
    कितना अच्छा होता गर दुनिया मयखाना--
    यकीकन खुदा तु भी छलकता पैमाने से
    फिर तेरे नाम पर ना कोई अफसाना होता

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  49. रिकॉर्ड टूट गया, रिकॉर्ड टूट गया, अब तक 44 पसन्द हो चुकी और ढेरों टिप्पणियाँ,,, जिन लोगों ने अब तक इस मामले में अपना मुँह नहीं खोला था वे भी आज बोल पड़े…। अब तक तो सिर्फ़ मैं, अनुनाद, वरुण, गरुणध्वज, गोदियाल जी और अवधिया जी ही बदनाम थे कि "ये लोग खामखा धार्मिक बहस में उलझते हैं और साम्प्रदायिकता को बढ़ावा देते हैं…" आज सबका भ्रम टूट गया होगा…। रचना जी को बधाई कि उन्होंने सारे ब्लागरों को एक सूत्र में पिरो दिया… (कुछ सेकुलरों को भी)…

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  50. ओहो फमस होते ही मोडरेशन यही तो है साजिश

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  51. http://indianwomanhasarrived.blogspot.com/2009/08/blog-post_20.html#comments

    naari blog par yae post shyadaa ki haen mr khurshid jaraa padh lae

    naari blogpar dharm ki nahin dharm kae naam par naari ko exploit karnae ki baat hotee haen

    issi blogpar aap suesh chiplunkar ,
    shastri ji aur albela khatri kae virdhu uthaayee gayee avaaj bhi milagae par unlogo nae kabhie yae nahin kehaa ki rachna naari blog par hindu ko target kartee haen


    naari blog naariyon ki zameen haen aur isko trp ki zarurat nahin haen

    aur aap ko kyaa kahun kyuki aap ka uparaa ayaa pehala kament hi kafii haen aap kae baarey mae kehnae kae liyae ki aap purush vaadi maansiktaa kae shikaar haen kyuki aap maeri umr ko target kar rahey haen

    maene apni post mae kyaa kahin bhi salim ki umr ki baat ki haen

    kuchh to muslim tehjeeb ki baat karey , mashoor haen muslim tehjeeb jisko aap sab mil kar dho rahey haen

    ReplyDelete
  52. suresh naari blogki hamesha koshish rehtee haen ki agar baat

    asmitaa aur astitav ko to peeth nahin deikyaii jayaegi

    har dharm kewal aur kewal mohabaat karna sikhaataa haen par uskae nauyaaii usii daerm kop lae kar ladtae haen


    hindustaan mae hindu dharm nahin haen ek sanskriti haen aur iska apmaan nahin ho iski purjor koshish sabko karnai chahiyae

    ham jis desh mae paedaa hotaey haen usake niyam aur kanuna mannaa hamara dharm haen

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  53. kisi musalman se hi musalman hone ka matalab suna tha...
    musalsal ho Eman jiska wo musalman....
    lekin sach kahu to is paribhasha par khara utar ne wala ek bhi musalman mujhe aaj tak milna to door, dikhayee ya sunayee bhi nahi diya....
    lekin aaj sheeba ko padhkar tazzub huwa... kya wo sach me muslim hain ya naam badal rakha hai....
    lekin agar sach me muslim hain to mujhe bahut khushi hai...
    magar afsos ye bhi hai ki un jaise kitne mumlim hain hi yaha....

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  54. ...aur jaha tak salim khan ke dharm ka sawal hai to jo dharm maa ki vandna (vande mataram) ki izazat nahi deta wo nariyo ki kis roop me izzat karega?
    salim khan bechara vaise hi ab tak poochhe gaye hajaro sawalo ka jawab nahi de paya hai to ab apke sawalo ka kya khak jawab dega?
    aur uska dost kairanvi...uske liye to main sabhi se kahunga k uske liye duwa karo k thik ho jaaye... bas har comment me ek hi baat...k teen hafte me pagal kar deta hu....uski mansik halat ka andaza lagaya ja sakta hai...wo thik nahi huwa to jaroor ek na ek din kahi khudkush hokar fat padega.... bhagwan use bada dil aur khula nazariya de...dosto duwa karo....

    ReplyDelete
  55. रचना जी,

    "न बुत होता, न बुत खाना होता
    न किसी किताब के जिंदा होने का बहाना होता
    कितना अच्छा होता गर दुनिया मयखाना--
    यकीकन खुदा तु भी छलकता पैमाने से
    फिर तेरे नाम पर ना कोई अफसाना होता"

    सबसे अच्छी टिप्पणी दी भाई आलोक नंदन ने...

    "सलीम खान मै मुस्लिम धर्म अपनाना चाहती हूँ बशर्ते"
    आपका यह सवाल ही बेमानी है।

    मैं तो कहता हूँ कि इस्लाम ही नहीं कोई भी धर्म अपनाने योग्य नहीं है। आप जैसे चाहे रहें, ईमानदारी से अपना काम करें और किसी भी ईश्वर और धर्म की शरण में जाने की न सोचें।
    कारण सीधा सा है ईश्वर व धर्म की अवधारणा स्वयं मानव दिमाग की उपज है, In the beginning there was man, once he had a lot of spare time...to kill the boredom he created GOD & RELIGION...and has not lived peacefully thereafter. अब जो चीज है ही नहीं केवल mental realm में अस्तित्व है उसका, क्या उसे मानना और क्या उसे बदलना?

    अगर आप में से कोई मुझे जवाब देना चाहता है तो कृपया आस्था, विश्वास आदि तर्कों का प्रयोग न करें और न ही किसी धर्म ग्रंथ का हवाला दें!


    (यह बिल्कुल न समझियेगा कि मैं आपकी पोस्ट का मकसद नहीं समझा हूँ आपका मकसद साफ है सलीम के प्रचार के खोखलेपन और उसके धर्म की कट्टरता को जगजाहिर करना, मैं तो अपने मत को प्रचारित करने के लिये टिपिया रहा हूँ। )

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  56. रचना जी,
    आपकी बात सच है कि नारी सभी धर्मों में द्वितीयक स्थान पर है. हाँ, हमारे देश में हिन्दू औरतों को तो संविधान से अधिकार मिल जाते हैं, पर मुस्लिम समाज पर्सनल लॉ के नाम पर अपनी औरतों को कुछ मूलभूत अधिकार नहीं देता.

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  57. मैं शीबा जी की बात से भी पूरी तरह सहमत हूँ. यद्यपि मैं कोई धर्म नहीं मानती, पर यह मानती हूँ कि भारत अन्य किसी भी देश की अपेक्षा बहुधर्मी, बहुसांस्कृतिक और बहुजातीय देश है और सभी धर्मों और संप्रदायों के प्रति सहिष्णु भी. इसे कट्टरवादियों ने बर्बाद कर रखा है और औरतों की भी स्थिति के लिये यही ज़िम्मेदार हैं.

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  58. विश्व स्तर पर समाज जानने के लिए जरूरी था , हर मजहब, पंथ ,संप्रदाय ,जाती ,प्रथा ,परंपरा को जानने की कोशिश करना और मैंने भी प्रयास किया .
    एक भी तथाकथित धर्म ऐसा नहीं पाया जहां की औरत को गुलाम बनाने और गुलाम बनाये रखने का षड़यंत्र नहीं पाया .सब के सब पितृसत्तात्मक सत्ता को ही पोषित करते मिले. किसी भी धर्म को बनाने में न सिर्फ नारी की कोई भूमिका ही नहीं रही, बल्कि उसकी बात भी सुनाने सुनने का कोई प्रावधान नहीं रहा .नाटक भले हो .
    हर धर्म नारी के खिलाफ अपने विद्वमान रूप में एक षड़यंत्र है और नारियों को इस जुवे को उतार फेंकना होगा.
    और यह सिर्फ नारियों के उत्कर्ष की बात नहीं है ,इसके लिए पूरे समाज के हर विवेकशील व्यक्ति को खडा होना चाहिए .क्योंकि इसके बिना समाज ही साफ़ नहीं हो सकता .
    हो सकता है मेरा यह सन्देश किसी को ' स्वच्छ ' न लगे पर नाक पर रुमाल रख कर नहीं वरन जरूरी हो तो हाथ में तलवार पकड़ कर घटिया 'सन्देश वाहकों 'की सफाई जरूरी है जो ' दीन,धर्म,पंथ ' के नाम पर दुनिया पर थोप दी गयी है.
    यहीं पर एक दुर्गंधित ' सन्देश ' के जबाब में रचना जी के साथ खड़े अनगिनत लोग मिले ,स्त्री पुरुष सभी , यह एक खुशी ही नहीं है बल्कि सही ताकत का ऐलान भी है .
    अब वक़्त आ गया है की एकमात्र खुशबू के नाम पर हर दुर्गन्ध से दुनिया को आजाद करने का और कराने का .और यह ताकत किसी इश्वर अल्लाह के नाम से नहीं बल्कि 'इंसानियत ' की ताकत मानी जाये .बस .
    वैसे अपने ब्लॉग पर ,' मैं हिन्दू हूँ ' लिख रखा है .आग्रह है कि कुछ कुतर्क करने के पहले उसे भी पढ़ लें तो शायद मेरी बात समझ में आना आसान हो जाये .

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  59. वैसे आलोक नंदन से भी काफी सहमत हूँ और वह भी बिना पिए :):)

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  60. "lekin aaj sheeba ko padhkar tazzub huwa... kya wo sach me muslim hain ya naam badal rakha hai....
    lekin agar sach me muslim hain to mujhe bahut khushi hai...
    magar afsos ye bhi hai ki un jaise kitne mumlim hain hi yaha...."

    haal-ahwaal ji, main Musalmaan hi hun, naam kamzor badaltey hain. Aapne meri mamooli rai ki qadr ki jiske liye main mashkoor hun.

    Hindustan me alfaaz/shabdon se bahot ghalat kaam liya ja raha hai. Jab marham ki zaroorat hai hum zakhm laga rahe hain.
    Issey achha gunga-behra hona hota shayad, na kehte, na sunte!

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  61. Replies
    1. haa hai
      अगर इस्लाम मैं कोई सच्चाई होती तो मुस्लिम शाषक और उनके सहयोगी कोई सेनापति, तोपची, कोई मंत्री,( दारा शिकोह, कबीर, रहीम, रसखान ) अपनी इच्छा से न तो हिन्दू होते और न कुरान को छोड़कर वेद , उपनिषद, गीता , और श्री क्रिशन की लीलाओं का वर्णन करते। भागता वो है जो भूखा होता है।।।और ये सब सनातन धरम मैं संतुष्ट भी हुए।।इन्होने वो पाया जो कही नहीं नहीं मिला।।

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